NPS FAQ: कितने में और कौन खोल सकता है खाता, कैसे मिलता है टैक्स बेनिफिट; जानें नेशनल पेंशन सिस्टम से जुड़ी अहम डिटेल
NPS 60 की उम्र के बाद पेंशन का इंतजाम करने के साथ-साथ टैक्स सेविंग भी कराती है। NPS के अंतर्गत दो तरह के खाते खुलते हैं- Tier-I और Tier-II। ये दो तरह के खाते किसलिए हैं, कौन निवेश कर सकता है, कैसे और कितने रुपये तक की टैक्स सेविंग की जा सकती है, आंशिक निकासी की सुविधा है या नहीं, अकाउंट की मैच्योरिटी पर क्या नियम है...आइए जानते हैं ऐसे तमाम सवालों के जवाब...
NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System)। कुछ लोग इसे न्यू पेंशन सिस्टम भी बुलाते हैं। इस स्कीम को रेगुलेट करने और पेंशन फंड की जिम्मेदारी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) पर है। इस सरकारी इन्वेस्टमेंट स्कीम को साल 2004 में शुरू किया गया था। पहले यह केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए थी। लेकिन फिर साल 2009 में सभी कैटगरी के लोगों के लिए इसे खोल दिया गया। इसका फायदा सरकारी और प्राइवेट, दोनों सेक्टर के कर्मचारी ले सकते हैं। NPS 60 की उम्र के बाद पेंशन का इंतजाम करने के साथ-साथ टैक्स सेविंग भी कराती है। आखिरी वक्त पर टैक्स सेविंग के विकल्पों में यह भी एक पॉपुलर विकल्प है।
NPS के अंतर्गत दो तरह के खाते खुलते हैं- Tier-I और Tier-II। ये दो तरह के खाते किसलिए हैं, कौन निवेश कर सकता है, कैसे और कितने रुपये तक की टैक्स सेविंग की जा सकती है, आंशिक निकासी की सुविधा है या नहीं, अकाउंट की मैच्योरिटी पर क्या नियम है...आइए जानते हैं ऐसे तमाम सवालों के जवाब...
कौन और किस उम्र से लगा सकता है पैसा?
NPS में कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। यहां तक कि यह NRI के निवेश के लिए भी ओपन है। लेकिन अगर व्यक्ति की नागरिकता बदल जाती है तो उसका अकाउंट क्लोज हो जाएगा।
कितनी उम्र से निवेश
NPS में 18 वर्ष की उम्र से लेकर 65 वर्ष का होने तक या फिर रिटायरमेंट तक निवेश किया जा सकता है। अकाउंट को 70 वर्ष की उम्र तक जारी रखा जा सकता है।
दो तरह के अकाउंट क्यों?
NPS के तहत Tier-I एक रिटायरमेंट अकाउंट होता है। कर्मचारी के लिए Tier-I अकाउंट एंप्लॉयर की ओर से खुलवाया जाता है। वहीं Tier-II एक वॉलंटरी अकाउंट है। Tier-II खाते को इन्वेस्टमेंट अकाउंट भी कहा जाता है। इसमें कोई भी वेतनभोगी अपनी तरफ से निवेश शुरू कर सकता है।
रिटायरमेंट या स्कीम मैच्योर होने के बाद क्या?
NPS के तहत रिटायरमेंट के बाद या मैच्योरिटी के वक्त या 60 वर्ष की उम्र पर पहुंचने पर, कर्मचारी को कुल कॉर्पस के मिनिमम 40 प्रतिशत से एन्युइटी प्लान लेना होता है। यही रेगुलर इनकम का जरिया बनता है। एन्युइटी इनकम ही पेंशन कहलाती है। बाकी का 60 प्रतिशत फंड एकमुश्त निकाला जा सकता है।
कितने में खुलेगा खाता
Tier-I NPS खाते को मिनिमम 500 रुपये और Tier-II NPS खाते को मिनिमम 1000 रुपये में खुलवा सकते हैं। निवेश की कोई लिमिट नहीं है।
इन्वेस्टमेंट की डिटेल
NPS में ऐसे सभी सरकारी कर्मचारी जिन्होंने 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद सर्विस जॉइन की है, उन्हें बेसिक सैलरी+DA का 10 प्रतिशत कॉन्ट्रीब्यूट करना होता है। राज्य सरकार के कर्मचारियों के मामले में इतना ही कॉन्ट्रीब्यूशन राज्य सरकार की ओर से रहता है। वहीं केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के मामले में केन्द्र सरकार की ओर से कॉन्ट्रीब्यूशन 14 प्रतिशत है। अब बात करते हैं कॉरपोरेट सेक्टर की। कॉरपोरेट सेक्टर या प्राइवेट सेक्टर में कर्मचारी की ओर से NPS में कॉन्ट्रीब्यूशन 50,000 रुपये है। एंप्लॉयर की ओर से कर्मचारी की बेसिक सैलरी+DA का 10 प्रतिशत कॉन्ट्रीब्यूट किया जाता है। याद रहे कि Tier I NPS खाते में हर वित्त वर्ष में मिनिमम 1000 रुपये का कॉन्ट्रीब्यूशन जरूरी है।
जहां तक Tier-II खाते/वालंटरी NPS अकाउंट की बात है तो इसमें कर्मचारी की ओर से कॉन्ट्रीब्यूशन सालाना आय के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। Tier-II खाते के लिए कोई मिनिमम कॉन्ट्रीब्यूशन नहीं है।
Tier-I NPS अकाउंट, एंप्लॉयर के माध्यम से खुलता है। वहीं वॉलंटरी यानी Tier-II अकाउंट बैंकों, ब्रोकरेज हाउसेज व अन्य वित्तीय संस्थानों या फिर e-NPS वेबसाइट के माध्यम से खुल जाता है। NPS के मामले में बैंक/ब्रोकरेज हाउस/वित्तीय संस्थानों को पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) भी कहा जाता है। खाता खुलवाने के लिए व्यक्ति को परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) और अन्य KYC डिटेल्स/डॉक्युमेंट्स की जरूरत होती है। रजिस्ट्रेशन होने के बाद व्यक्ति को परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) मिलता है। खाता ऑनलाइन खुलवाने के लिए आधार नंबर, मोबाइल नंबर से लिंक होना जरूरी है।
टैक्स बेनिफिट
पुरानी आयकर व्यवस्था के तहत NPS में जमा पर टैक्स डिडक्शन लिया जा सकता है, जिसकी लिमिट 1.5 लाख रुपये सालाना तक है। NPS पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD1 के तहत 1.5 लाख रुपये तक के डिडक्शन के अलावा 50000 रुपये तक का अतिरिक्त डिडक्शन, सेक्शन 80CCD(1B) के तहत भी मिलता है। मैच्योरिटी अमाउंट में से जो 60 प्रतिशत तक फंड एकमुश्त मिलता है, वह टैक्स फ्री है लेकिन मंथली एन्युइटी इनकम टैक्सबेल है। यह योजना, एक्युमुलेशन के दौरान और साथ ही मैच्योरिटी के समय विभिन्न इनकम टैक्स बेनिफिट प्रदान करती है। ये डिडक्शंस आयकर कानूनों के तहत निर्दिष्ट 3 अलग-अलग सेक्शंस के माध्यम से क्लेम किए जाते हैं। ये सेक्शंस हैं-
1. सेक्शन 80CCD (1) (सेक्शन 80C के ओवरऑल अंब्रैला के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का डिडक्शन)
2. सेक्शन 80CCD (1b) (50,000 रुपये का अतिरिक्त डिडक्शन)
3. सेक्शन 80CCD (2) (NPS खाते में एंप्लॉयर का योगदान)
1 अप्रैल 2020 से प्रभावी नई आयकर व्यवस्था के तहत सैलरीड एंप्लॉयी, अपने NPS खाते में एंप्लॉयर की ओर से किए जाने वाले कॉन्ट्रीब्यूशन पर Section 80CCD(2) के तहत टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता है।
कितना मिलेगा रिटर्न?
NPS का रिटर्न निश्चित नहीं है क्योंकि यह मार्केट बेस्ड है। हालांकि अतीत में स्कीम के तहत Tier-I इक्विटी एसेट क्लास में 9-12% का रिटर्न मिला है।
NPS खाते के 3 साल पूरे होने से पहले पैसा नहीं निकाला जा सकता है। इसके बाद Tier I अकाउंट से चुनिंदा हालात में पैसा मैच्योरिटी से पहले निकाला जा सकता है या फिर एग्जिट किया जा सकता है। अगर Tier I खाते में कुल कॉर्पस 2 लाख रुपये से कम है तो सब्सक्राइबर 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर 100% फंड एकमुश्त निकाल सकता है। वहीं Tier II खाते से कभी भी पैसा निकाला जा सकता है। सब्सक्राइबर NPS खाते से मैक्सिमम 3 बार आंशिक निकासी कर सकता है।