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New Labour Code: 50 फीसदी बेसिक पे के नए नियम से कितनी बदल जाएगी आपकी सैलरी स्लिप?

New Labour Code: नए लेबर कोड में कहा गया है कि एंप्लॉयीज की कुल सैलरी में बेसिक सैलरी की हिस्सेदारी कम से कम 50 फीसदी होनी चाहिए। हालांकि, नए नियम में एंप्लॉयर्स को यह नहीं कहा गया है कि उन्हें सैलरी का स्ट्रक्चर किस तरह से तय करना होगा

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Apr 14, 2026 पर 5:52 PM
New Labour Code: 50 फीसदी बेसिक पे के नए नियम से कितनी बदल जाएगी आपकी सैलरी स्लिप?
नए नियमों की वजह से एंप्लॉयर्स की कुल कॉस्ट बढ़ जाएगी।

New Labour Code: नए लेबर कोड का असर हर महीने बैंक अकाउंट में आने वाली एंप्लॉयीज की सैलरी पर भी पड़ेगा। नए लेबर कोड्स को ध्यान में रख कंपनियां एंप्लॉयीज की सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही हैं। इधर, एंप्लॉयीज की दिलचस्पी यह जानने में है कि उनके बैंक अकाउंट में आने वाली सैलरी पर क्या असर पड़ने जा रहा है। नए लेबर कोड के जिस नियम का सैलरी पर सबसे ज्यादा असर पड़ने वाला है, वह है बेसिक सैलरी से जुड़ा नया नियम। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

बेसिक पे कुल सैलरी का कम से कम 50 फीसदी

नए लेबर कोड में कहा गया है कि एंप्लॉयीज की कुल सैलरी में बेसिक सैलरी की हिस्सेदारी कम से कम 50 फीसदी होनी चाहिए। हालांकि, नए नियम में एंप्लॉयर्स को यह नहीं कहा गया है कि उन्हें सैलरी का स्ट्रक्चर किस तरह से तय करना होगा। इसकी जगह पीएफ, एंप्लॉयी स्टेट इंश्योरेंस, ग्रैच्युटी और बोनस जैसे जरूरी कंट्रिब्यूशन के लिए वेजेज (Wages) की परिभाषा तय की गई है।

एंप्लॉयीज का सैलरी स्ट्रक्चर बदल जाएगा

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