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पार्टनरशिप फर्म या LLP पार्टनर्स की ज्यादा सैलरी पर डिडक्शन क्लेम कर सकेंगी, सरकार ने फाइनेंस बिल 2024 में किया संशोधन

फाइनेंस बिल, 2024 में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 40 में संशोधन से पार्टनरशिप फर्मों और एलएलपी को काफी फायदा होगा। अब वे पार्टनर्स को पहले से ज्यादा सैलरी दे सकेंगी और उस पर डिडक्शन क्लेम कर सकेंगी। लेकिन, इसके लिए उन्हें अपनी पार्टनरशिप डीड में संशोधन करना होगा

Abhishek Anejaअपडेटेड Aug 12, 2024 पर 11:40 AM
पार्टनरशिप फर्म या LLP पार्टनर्स की ज्यादा सैलरी पर डिडक्शन क्लेम कर सकेंगी, सरकार ने फाइनेंस बिल 2024 में किया संशोधन
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 40 में किया गया संशोधन एसेसमेंट ईयर 2025-26 से लागू होगा।

फाइनेंस बिल, 2024 में पार्टनरशिप फर्मों और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) के लिए एक अच्छा प्रावधान शामिल है। यह प्रावधान फर्म के वर्किंग पार्टनर्स के रेम्यूनरेशन की लिमिट से जुड़ा है। सरकार ने इस रेन्यूनरेशन की लिमिट बढ़ाने के लिए टैक्स के नियमों में संशोधन किया है। इसका लाभ पार्टनरशिप फर्मों और एलएलपी को मिलेगा। आइए इस संशोधन को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।

किसी पार्टनरशिप फर्म (Partnership Firm) या एलएलपी (LLP) के पार्टनर्स के रेम्यूनरेशन (सैलरी) से जुड़े टैक्स के नियम इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 40 में शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि रेन्यूनरेशन यानी सैलरी का पेमेंट सिर्फ वर्किंग पार्टनर्स को किया जा सकता है। रेम्यूनरेशन का अमाउंट और उसके कैलकुलेशन का तरीका पार्टनरशिप डीड में एप्रूव्ड होना चाहिए। पार्टनर की सैलरी की लिमिट भी सेक्शन 40 में बताई गई है। अगर कोई पार्टनरशिप फर्म या एलएलपी इस लिमिट से ज्यादा पेमेंट बतौर सैलरी पार्टनर्स को करता है तो उसे इस खर्च पर डिडक्शन करने की इजाजत नहीं होगी। उसे इस पर टैक्स चुकाना होगा।

पहले लिमिट क्या थी?

1. पहले 3,00,000 रुपये के बुक ऑफ प्रॉफिट का 90 फीसदी और लॉस की स्थिति में 1,50,000 रुपये, दोनों में से जो ज्यादा होगा।

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