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नोएडा और ग्रेटर नोएडा की रियल एस्टेट कंपनियों को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने बकाया पेमेंट पर कम इंटरेस्ट रेट की मांग नहीं मानी

घर खरीदारों का मानना है कि 28 फरवरी को कम इंटरेस्ट की मांग वाली बिल्डर्स की याचिका सुप्रीम कोर्ट के खारिज कर देने के बाद प्लॉट के बकाया अमाउंट के पेमेंट को लेकर चल रहा गतिरोध खत्म हो जाएगा। इससे रजिस्ट्री की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू हो जाएगी और ग्राहकों पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ भी नहीं डाला जाएगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 01, 2023 पर 11:50 AM
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की रियल एस्टेट कंपनियों को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने बकाया पेमेंट पर कम इंटरेस्ट रेट की मांग नहीं मानी
जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा की तरफ से फाइल किए गए कई अप्लिकेशंस खारिज कर दिए। इनमें इंटरेस्ट रेट को आम्रपाली प्रोजेक्ट्स के इंटरेस्ट रेट्स के बराबर रखने की मांग की गई थी।

ग्रेटर नोएडा और नोएडा की रियल एस्टेट कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 28 फरवरी को उनके इंटरवेंशन अप्लिकेशन (IAs) को खारिज कर दिया। रियल एस्टेट कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट के 7 नवंबर के आदेश के खिलाफ यह अप्लिकेशन फाइल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में अथॉरिटीज को प्लॉट के बकाया पेमेंट में देरी पर इंटरेस्ट रेट की 8 फीसदी की सीमा हटा दी थी। इसका मतलब है कि अब बिल्डर्स को अथॉरिटीज की तरफ से तय ज्यादा इंटरेस्ट रेट्स के हिसाब से बकाया का पेमेंट करना होगा।

आम्रपाली प्रोजेक्ट्स के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राहत

जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा की तरफ से फाइल किए गए कई अप्लिकेशंस खारिज कर दिए। इनमें इंटरेस्ट रेट को आम्रपाली प्रोजेक्ट्स के इंटरेस्ट रेट्स के बराबर रखने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली मामले में दो अथॉरिटीज को 18 फीसदी इंटरेस्ट रेट की जगह MCLR रेट का इस्तेमाल करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने 42,000 घर खरीदारों के हित को देखते हुए यह आदेश दिया था। आम्रपाली प्रोजेक्ट्स का मामला भी अलग था। इसमें 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा फंड का दुरुपयोग हुआ था।

रियल एस्टेट कंपनियां आम्रपाली जैसी राहत चाहती थीं

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