लगभग 20 साल से अपने सपनों के घर की बाट जोह रहे हजारों खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट से एक राहत मिली है। कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) के उस आदेश को गुरुवार को बरकरार रखा, जिसमें NBCC को कर्ज में डूबी सुपरटेक के 16 हाउसिंग प्रोजेक्ट जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है। NBCC सरकार के मालिकाना हक वाली कंपनी है, वहीं सुपरटेक लिमिटेड एक रियल एस्टेट कंपनी है। सुपरटेक के 16 हाउसिंग प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और कर्नाटक में अटके हैं। इनमें 49748 घरों के कंप्लीट होने का लगभग 27,000 घर खरीदार इंतजार कर रहे हैं।
अदालत ने सभी ट्राइब्यूनल्स और हाईकोर्ट्स को यह आदेश दिया है कि वे ऐसा कोई भी आदेश न दें, जिससे NBCC लिमिटेड द्वारा किए जा रहे कंस्ट्रक्शन वर्क रुक जाएं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी असाधारण शक्ति का इस्तेमाल करते हुए NCLAT के 12 दिसंबर, 2024 के आदेश को बरकरार रखा। इस आदेश में NBCC को घर खरीदारों के हित में प्रोजेक्ट्स को अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया गया था।
घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना सबसे पहली प्राथमिकता
पीठ ने कहा कि कई घर खरीदारों के मुताबिक, सुपरटेक ने 2010-12 के दौरान डिलीवरी के लिए लगभग 51,000 घरों की बुकिंग की थी। चीफ जस्टिस ने कहा कि पीठ के लिए सबसे पहली प्राथमिकता घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना है। ऐसा इसलिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें वे घर मिल सकें, जिनका वे पिछले दो दशकों से इंतजार कर रहे हैं। चीफ जस्टिस ने यह साफ कर दिया कि सुपरटेक के फाइनेंशियल और ऑपरेशनल लेनदारों के हितों और बकाया का ध्यान तभी रखा जा सकता है, जब परेशान घर खरीदारों को पूरी तरह से तैयार घर मिल जाएं।
पीठ ने यह भी कहा कि मकानों में पानी, बिजली, सीवेज कनेक्शन जैसी सभी सुनिश्चित सुविधाएं होनी चाहिए, साथ ही आस-पास सड़कें और पार्क भी होने चाहिए। सुपरटेक के फाइनेंशियल और ऑपरेशनल लेनदारों को नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) और NCLAT द्वारा न्यायसंगत पाए गए नुकसान को स्वीकार करना होगा।
प्रोजेक्ट्स में बाधा आने पर संबंधित पक्ष कर सकते हैं अपील
पीठ ने निर्देश दिया कि NBCC प्रोजेक्ट्स को जल्द से जल्द पूरा करे और NCLAT द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति उसे जरूरी सहयोग प्रदान करे। पीठ ने कहा कि अगर प्रोजेक्ट्स में कोई बाधा आती है, तो संबंधित पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं। NBCC ने 16 प्रोजेक्ट्स को 3 चरणों में पूरा करने का प्रस्ताव दिया था। पहले चरण में इको-विलेज-2 (ग्रेटर नोएडा), रोमानो (नोएडा), केपटाउन (नोएडा), जार सूट्स (ग्रेटर नोएडा), इको-विलेज-3 (ग्रेटर नोएडा), स्पोर्ट्स विलेज (ग्रेटर नोएडा) और इको-सिटी (नोएडा) को पूरा करने का प्रस्ताव दिया था। फेज 2 के तहत, नॉर्थआई (नोएडा), अपकंट्री (यमुना एक्सप्रेसवे), इको-विलेज-1 (ग्रेटर नोएडा), मेरठ स्पोर्ट्स सिटी (मेरठ) और ग्रीन विलेज (मेरठ) का काम करने का प्रस्ताव दिया गया।
फेज 3 के लिए हिलटाउन (गुरुग्राम), अराविल (गुरुग्राम), रिवरक्रेस्ट (रुद्रपुर), दून स्क्वायर (देहरादून) और मिकासा (बेंगलुरु) का काम करने का प्रस्ताव दिया गया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 20 मार्च, 2021 को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 7 के तहत सुपरटेक के खिलाफ इनसॉल्वेंसी की कार्यवाही शुरू की थी।