रियल एस्टेट कंपनियां नए रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स लॉन्च करते वक्त ग्राहकों से कई वादें करती हैं। इसका मकसद ग्राहक को अट्रैक्ट करना होता है। ग्राहक के फ्लैट खरीद लेने के बाद कंपनी का व्यवहार बदल जाता है। कंपनी के वादों पर भरोसा कर फ्लैट खरीदने वाले ग्राहक को मायूसी हाथ लगती है। ग्राहक को पेश आने वाली एक सबसे बड़ी दिक्कत प्रोजेक्ट का समय पर नहीं होना है। इससे खासकर उन ग्राहकों को ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ता है, जिन्होंने होम लोन लेकर फ्लैट खरीदा है। होम लोन लेने के बाद उसकी ईएमआई शुरू हो जाती है। सवाल है कि फ्लैट की डिलीवरी में देरी पर रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ कहां शिकायत की जा सकती है?
रेरा में की जा सकती है शिकायत
सरकार ने घर खरीदारों के हित में रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट, 2016 बनाया था। इसे 1 मई, 2016 से लागू कर दिया गया। रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ किसी तरह की शिकायत उस राज्य के रेरा (RERA) में की जा सकती है, जहां प्रोजेक्ट स्थित है। सरकार ने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (Real Estate Regulatory Authority) को कई अधिकार दिए हैं। वह शिकायत सही पाए जाने पर रियल एस्टेट कंपनी को मुआवजे का भुगतान करने को कह सकती है। वह प्रोजेक्ट जल्द पूरा करने के लिए रियल एस्टेट कंपनी पर दबाव बना सकती है।
कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है ग्राहक
ग्राहक कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 के तहत भी शिकायत कर सकता है। घर खरीदार को इस एक्ट के तहत ग्राहक माना गया है। ग्राहक नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ शिकायत कर सकता है। यह अर्द्ध-न्यायिक फोरम है। हर राज्य में यह फोरम होता है। अगर प्रॉपर्टी की वैल्यू 20 लाख रुपये तक है तो डिस्ट्रिक्ट फोरम में शिकायत की जा सकती है। 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की प्रॉपर्टी की शिकायत राज्य कमीशन में की जा सकती है। 1 करोड़ से ज्यादा कीमत की प्रॉपर्टी की शिकायत नेशनल कमीशन में करनी होगी।
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NCLT में शिकायत की जा सकती है
रियल एस्टेट कंपनी के प्रोजेक्ट समय पर नहीं पूरा करने पर उसके खिलाफ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू किया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए कम से कम 100 फ्लैट खरीदारों या प्रोजेक्ट के कम से कम 10 फीसदी ग्राहकों का एक साथ आना जरूरी है। यह भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि डिफॉल्ट का कुल अमाउंट 1 करोड़ रुपये से ज्यादा होना चाहिए। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 में घर खरीदार को फाइनेंशियल क्रेडिटर माना गया है। इस कोड के तहत घर खरीदार NCLT में शिकायत कर सकते हैं।