Rupee at all-time low: भारतीय रुपया पिछले कुछ समय से लगातार दबाव में है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूत मांग की वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है।

Rupee at all-time low: भारतीय रुपया पिछले कुछ समय से लगातार दबाव में है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूत मांग की वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है।
रुपये में गिरावट का असर तुरंत हर व्यक्ति पर नहीं दिखता, लेकिन अगर यह कमजोरी लंबे समय तक बनी रहती है, तो धीरे-धीरे कई आयातित सामान और विदेश से जुड़े खर्च भारतीयों के लिए महंगे हो सकते हैं।
रुपया कमजोर क्यों हो रहा है?
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ा है।
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ जाता है। इससे तेल कंपनियों को ज्यादा डॉलर खरीदने पड़ते हैं, डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है।
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने की वजह से भी रुपये समेत कई उभरते देशों की करेंसी कमजोर हुई हैं। आइए जानते हैं कि कमजोर रुपये से कौन-कौन से चार नुकसान हो सकते हैं।
1. कौन-कौन सी चीजें महंगी हो सकती हैं?
कमजोर रुपये का सबसे सीधा असर आयातित सामान पर पड़ता है। स्मार्टफोन, लैपटॉप, कैमरा, गेमिंग कंसोल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो सकते हैं। क्योंकि कंपनियों को डॉलर में भुगतान करने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
जो कंपनियां विदेश से कच्चा माल या पार्ट्स मंगाती हैं, उनकी लागत भी बढ़ सकती है। बाद में कंपनियां यह अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं।
2. विदेश यात्रा और पढ़ाई पर असर
रुपया कमजोर होने का मतलब है कि हर डॉलर खरीदने के लिए भारतीयों को ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इसका असर विदेश यात्रा पर सीधा पड़ सकता है।
होटल, शॉपिंग, खाना-पीना और दूसरे खर्च पहले से ज्यादा महंगे लग सकते हैं। इसी तरह विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और उनके परिवारों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि फीस, किराया और रहने का खर्च रुपये के हिसाब से बढ़ जाएगा।
3. पेट्रोल-डीजल और महंगाई बढ़ सकती है
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और रुपया कमजोर रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
ईंधन महंगा होने पर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है। इसका असर धीरे-धीरे किराना, फूड डिलीवरी, रोजमर्रा के सामान और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
4. कारोबार और घर के बजट पर असर
एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर आयात पर ज्यादा निर्भर हैं। इन्हें लागत बढ़ने का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं आम परिवारों के लिए लगातार महंगाई और बढ़ते खर्च की वजह से ट्रैवल, गैजेट्स और लाइफस्टाइल खर्चों पर असर पड़ सकता है।
कमजोर रुपया फायदेमंद भी है?
रुपये की कमजोरी हर सेक्टर के लिए नुकसानदायक नहीं होती। आईटी सर्विसेज और फार्मा जैसी एक्सपोर्ट वाली कंपनियों को फायदा हो सकता है। उनकी डॉलर में कमाई होती है और डॉलर को रुपये में बदलने पर ज्यादा रकम मिलती है।
विदेश से पैसा भेजने वाले भारतीयों के परिवारों को भी फायदा हो सकता है, क्योंकि हर डॉलर के बदले ज्यादा रुपये मिलेंगे।
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