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Salary Rule: किराया, EMI और SIP के बीच कैसे बांटे सैलरी? ये शानदार फॉर्मूला करेगा आपकी मदद

Salary Rule: सैलरी आने के बाद किराया, EMI, SIP और बचत के बीच सही संतुलन बनाना आसान नहीं होता। 50/30/20 नियम एक आसान तरीका बताता है, जिससे जरूरी खर्च, लाइफस्टाइल और भविष्य की बचत को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। जानिए पूरी डिटेल।

Edited By: Suneel Kumarअपडेटेड May 10, 2026 पर 11:14 PM
Salary Rule: किराया, EMI और SIP के बीच कैसे बांटे सैलरी? ये शानदार फॉर्मूला करेगा आपकी मदद
SIP और निवेश के साथ-साथ इमरजेंसी फंड बनाना भी बेहद जरूरी माना जाता है।

हर महीने सैलरी आते ही सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि पैसा कहां और कितना खर्च किया जाए। किराया देना है, EMI भरनी है, निवेश भी करना है और कुछ पैसा बचाना भी जरूरी है। कई नौकरीपेशा लोग अच्छी कमाई के बावजूद महीने के आखिर तक आर्थिक दबाव महसूस करते हैं, क्योंकि उनके पास पैसों को बांटने का कोई साफ सिस्टम नहीं होता।

ऐसे में 50/30/20 नियम एक आसान और काफी लोकप्रिय तरीका माना जाता है। यह नियम बताता है कि आपकी सैलरी का कितना हिस्सा जरूरी खर्चों, लाइफस्टाइल और बचत में जाना चाहिए। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर लंबे समय तक इस नियम को अनुशासन के साथ अपनाया जाए, तो आर्थिक तनाव कम किया जा सकता है और भविष्य के बड़े लक्ष्य भी आसानी से हासिल किए जा सकते हैं।

क्या है 50/30/20 नियम

इस नियम के तहत टैक्स कटने के बाद मिलने वाली सैलरी को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। करीब 50% हिस्सा जरूरी खर्चों के लिए रखा जाता है। इसमें किराया, EMI, राशन, बिजली-पानी के बिल, बच्चों की फीस और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे खर्च शामिल होते हैं।

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