Silver Price Crash: चांदी में शुरू हो गई साल 1980 जैसी गिरावट? दो दिन में 35% से अधिक टूटा भाव, निवेशक बर्बाद
Silver Price Crash: कमोडिटी बाजार में रविवार 1 फरवरी को बजट से पहले कोहराम मच गया। सोने और चांदी की कीमतें लगातार दूसरे दिन क्रैश कर गईं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) दोनों का भाव करीब 9% टूटकर अपनी लोअर सर्किट सीमा में आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी बिकवाली और प्रॉफिट बुकिंग के चलते इन दोनों कीमती धातुओं में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट दिखी
Silver Price Crash: MCX पर चांदी के मार्च फ्यूचर्स का भाव 9 प्रतिशत टूटकर अपनी लोअर सर्किट सीमा पर आ गया
Silver Price Crash: कमोडिटी बाजार में रविवार 1 फरवरी को बजट से पहले कोहराम मच गया। सोने और चांदी की कीमतें लगातार दूसरे दिन क्रैश कर गईं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) दोनों का भाव करीब 9% टूटकर अपनी लोअर सर्किट सीमा में आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी बिकवाली और प्रॉफिट बुकिंग के चलते इन दोनों कीमती धातुओं में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट दिखी।
इससे पहले शुक्रवार को ग्लोबल मार्केट में चांदी की कीमतों में इंट्राडे 37% की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई थी। यह पिछले कई सालों की सबसे बड़ी इट्राडे गिरावट थी। इस गिरावट का असर आज भारतीय बाजारों पर भी दिखा। शनिवार की छुट्टी के बाद आज रविवार 1 फरवरी को बजट के दिन जब कमोडिटी बाजार खुला, तो चांदी 9% तक टूट गई।
MCX पर चांदी के मार्च फ्यूचर्स का भाव 9 प्रतिशत या करीब 26,273 रुपये टूटकर 2,65,652 रुपये के स्तर पर आ गया। सिर्फ चांदी ही नहीं, सोने (Gold Price) ने भी निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है। एमसीएक्स पर सोने के दाम भी रविवार सुबह 9% की गिरावट के साथ लोअर सर्किट पर आ गए।
चांदी की कीमतों में इस भारी गिरावट ने छोटे निवेशकों को बर्बाद कर दिया है। बाजार में इस समय 'पैनिक सेलिंग' का माहौल है। इस गिरावट ने साल 1980 की यादें ताजा कर दी है, जब चांदी में इसके इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा क्रैश आया था।
1980 की 'हंट ब्रदर्स' घटना और आज का बाजार
बाजार के दिग्गज इस गिरावट की तुलना 1980 के उस दौर से कर रहे हैं, जिसने ग्लोबल अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया था। उस समय चांदी की कीमतों में आए असामान्य उछाल और फिर उसके औंधे मुंह गिरने के पीछे अमेरिका के दो अरबपतिय भाइयों 'हंट ब्रदर्स' (हर्बर्ट और बंकर हंट) का हाथ था।
क्या था हंट ब्रदर्स का वह 'सिल्वर गेम'?
1970 के दशक की शुरुआत में जब अमेरिकी डॉलर का सोने से नाता टूटा, गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म हुआ, तो दुनिया भर में महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ गई। ऐसे में अमेरिका के अरबपति हंट भाइयों ने चांदी को 'सुरक्षित निवेश' मानकर खरीदना शुरू किया। लेकिन देखते ही देखते यह निवेश दुनिया की सबसे बड़ी सट्टेबाजी में बदल गया।
1973 से 1979 के बीच इन दोनों भाइयों ने मिलकर इतना फिजिकल सिल्वर और फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट खरीदे कि दुनिया की कुल चांदी का एक-तिहाई हिस्सा इनके नियंत्रण में आ गया। नतीजा यह हुआ कि 1973 में जो चांदी 1.95 डॉलर प्रति औंस थी, वह जनवरी 1980 तक 25 गुना बढ़कर 50 डॉलर पर पहुंच गई।
27 मार्च 1980: 'सिल्वर थर्सडे' का खौफ
जब हंट भाइयों का यह 'कॉर्नरिंग द मार्केट' खेल अमेरिकी नियामकों की नजर में आया, तो नियम कड़े कर दिए गए। मार्जिन मनी की शर्तें इतनी कठिन हो गईं कि हंट भाई नए सौदे नहीं कर पाए। 27 मार्च 1980 को चांदी की कीमत एक ही दिन में 50 फीसदी गिरकर 11 डॉलर के नीचे आ गई। इसे आज भी 'सिल्वर थर्सडे' के नाम से जाना जाता है।
आज के हालात और चिंताएं
मौजूदा समय में चांदी की चाल भी वैसी ही दिख रही है। पिछले 10 साल में चांदी 10 गुना और सोना 5 गुना बढ़ चुका है। हालिया तेजी में इंडस्ट्रियल डिमांड और सोलर पैनल सेक्टर की मांग का तर्क दिया जा रहा था, लेकिन शुक्रवार की गिरावट ने साबित कर दिया कि बाजार में सट्टेबाजी (Speculation) का स्तर बहुत ऊंचा था।
चांदी के दाम क्यों हुए क्रैश?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी हमेशा से एक 'हाई-बीटा' कमोडिटी रही है, यानी इसमें उतार-चढ़ाव बहुत तेज होता है। उन्होंने बताया कि निवेशकों ने चांदी की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद बड़े इसमें आज भारी मुनाफावसूली की है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के नाम का ऐलान कर दिया है। इसका असर डॉलर पर पड़ा है। डॉलर में मजबूती आई है। डॉलर में मजबूती आने से सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ जाती है।
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