Silver Price: बुधवार, 14 जनवरी के कारोबार में MCX पर 5 मार्च डिलीवरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। चांदी की कीमत एक ही दिन में 12,803 रुपये प्रति किलो उछलकर 2,87,990 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर तक पहुंच गई।

Silver Price: बुधवार, 14 जनवरी के कारोबार में MCX पर 5 मार्च डिलीवरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। चांदी की कीमत एक ही दिन में 12,803 रुपये प्रति किलो उछलकर 2,87,990 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर तक पहुंच गई।
दोपहर 03:06 बजे, MCX सिल्वर 10,311 रुपये यानी 3.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,85,498 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी। आइए जानते हैं कि किन 5 कारणों के चलते चांदी की कीमत नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची है।
1. वैश्विक तनाव ने बढ़ाई सुरक्षित निवेश की मांग
दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। वेनेजुएला संकट, ईरान में विरोध प्रदर्शन और रूस-यूक्रेन युद्ध से अनिश्चितता बढ़ी है। इसके चलते निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बना रहे हैं। ऐसे माहौल में सोने के साथ-साथ चांदी को भी सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जा रहा है।
जब शेयर बाजार या वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर डर बढ़ता है, तो निवेशक पैसा ऐसी जगह लगाते हैं जहां जोखिम कम हो। यही वजह है कि चांदी की मांग अचानक तेज हुई है और इसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है।
2. डॉलर की कमजोरी और करेंसी अनिश्चितता का असर
चांदी की कीमतों पर डॉलर की चाल का बड़ा असर पड़ता है। हाल के समय में डॉलर में कमजोरी और वैश्विक करेंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे हालात में निवेशक कागजी मुद्राओं की बजाय कीमती धातुओं की ओर रुख करते हैं।
जब डॉलर कमजोर होता है, तो चांदी जैसी कमोडिटी दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सस्ती पड़ती है। इससे अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ती है और कीमतों को सपोर्ट मिलता है।
3. निवेश के तौर पर चांदी में लौट रहा भरोसा
बीते कुछ वर्षों में चांदी को सिर्फ ज्वेलरी या औद्योगिक धातु नहीं, बल्कि निवेश के मजबूत विकल्प के रूप में भी देखा जाने लगा है। खासकर तब, जब इक्विटी बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है और बॉन्ड पर रिटर्न आकर्षक नहीं रहता।
रिटेल निवेशकों से लेकर बड़े फंड्स तक, सभी ने चांदी में हिस्सेदारी बढ़ानी शुरू की है। इसी निवेश मांग ने चांदी की कीमतों को नई ऊंचाई दी है।
4. इंडस्ट्री से बढ़ती मांग से बढ़ी चांदी की चमक
चांदी की खास बात यह है कि यह सिर्फ निवेश की धातु नहीं है, बल्कि इसका बड़े पैमाने पर औद्योगिक इस्तेमाल भी होता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में चांदी की खपत तेजी से बढ़ रही है।
जैसे-जैसे दुनिया रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे चांदी की औद्योगिक मांग भी लगातार मजबूत होती जा रही है। यही मांग कीमतों को लंबे समय का सपोर्ट दे रही है।
5. डिमांड के मुकाबले काफी कम है सप्लाई
चांदी की तेजी का एक बड़ा कारण सप्लाई-डिमांड का असंतुलन भी है। वैश्विक स्तर पर चांदी का उत्पादन उतनी तेजी से नहीं बढ़ पा रहा, जितनी तेजी से इसकी मांग बढ़ रही है।
कई बाजारों में फिजिकल चांदी की उपलब्धता सीमित बताई जा रही है। डिलीवरी में देरी और स्टॉक की कमी की खबरों ने भी कीमतों पर दबाव बनाया है। जब बाजार को लगता है कि आगे सप्लाई और टाइट हो सकती है, तो कीमतें पहले ही ऊपर भागने लगती हैं।
निवेश और इंडस्ट्री के बीच खड़ी है चांदी
एनालिस्ट्स का कहना है कि मौजूदा साइकिल में चांदी एक ऐसी रणनीतिक धातु के रूप में उभर रही है, जहां निवेश की मांग और औद्योगिक बदलाव दोनों साथ-साथ काम कर रहे हैं। यही वजह है कि चांदी को लेकर बाजार में दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
भारत में क्यों ज्यादा मजबूत दिख रही चांदी?
एक्सपर्ट के मुताबिक, पारंपरिक तौर पर वैल्यू स्टोर मानी जाने वाली चांदी अब सिर्फ निवेश की धातु नहीं रही। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स से इसकी संरचनात्मक मांग तेजी से बढ़ रही है।
जैसे-जैसे भारत रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर बढ़ा रहा है, वैसे-वैसे चांदी की औद्योगिक अहमियत इसकी लंबी अवधि की कीमतों को मजबूत सहारा दे रही है। इसके साथ ही, रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और HNI व फैमिली कैपिटल की रुचि चांदी को सोने के साथ एक अहम पोर्टफोलियो डाइवर्सिफायर बना रही है।
टेक्निकल चार्ट्स पर भी मजबूत है चांदी
बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Enrich Money के CEO पोन्मुडी आर का कहना है कि करीब 2,86,000 रुपये के आसपास ट्रेड कर रही MCX सिल्वर एक मजबूत बुलिश चैनल में बनी हुई है। उनके मुताबिक, हर गिरावट पर लगातार खरीदारी दिख रही है, जो मजबूत मांग का संकेत है। इसी वजह से चांदी प्रेशियस मेटल्स में एक हाई-बीटा आउटपरफॉर्मर के तौर पर उभर रही है।
उन्होंने कहा कि अगर कीमतें 2,85,000 रुपये के ऊपर टिके रहती हैं, तो तेजी का रुझान बरकरार रह सकता है और आने वाले समय में 2,90,000 से 3,00,000 रुपये या उससे ऊपर के स्तर भी देखने को मिल सकते हैं।
हालांकि, अगर किसी कारण से कीमत 2,70,000 रुपये के नीचे फिसलती है, तो 2,65,000 से 2,48,000 रुपये के स्तर तक करेक्शन आ सकता है, जहां नई खरीदारी उभरने की उम्मीद है।
क्या इशारा कर रहा है गोल्ड-सिल्वर रेशियो?
WealthTrust Capital Services की फाउंडर और CEO और स्मॉलकेस मैनेजर स्नेहा जैन का कहना है कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो अब अपने ऐतिहासिक औसत स्तर पर लौट आया है।
उनके मुताबिक, मौजूदा कीमतों पर चांदी कुछ हद तक महंगी नजर आती है। इस रेशियो के आधार पर देखें तो अगले एक साल के नजरिये से सोना चांदी के मुकाबले बेहतर अनुमानित रिटर्न देता है, यानी इस समय गोल्ड का रिस्क-रिवॉर्ड ज्यादा संतुलित दिखता है।
एक्सपर्ट ने निवेशकों को आगाह किया कि चांदी स्वभाव से सोने की तुलना में कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली धातु है। वैश्विक आर्थिक ग्रोथ की उम्मीदें, डॉलर की चाल और सट्टेबाजी की गतिविधियां इसकी कीमतों में तेज हलचल ला सकती हैं। ऐसे में चांदी में निवेश हमेशा अनुशासित एलोकेशन के साथ और मध्यम से लंबी अवधि के नजरिये से ही करना चाहिए।
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