Silver Price Outlook: 2025 में चांदी में 160% से ज्यादा की तेजी, मोतीलाल ओसवाल ने बताई आगे की रणनीति
Silver Price Outlook: 2025 में चांदी ने 160% से ज्यादा रिटर्न दिया है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक यह तेजी सट्टेबाजी नहीं, बल्कि सप्लाई संकट और स्ट्रक्चरल बदलाव का नतीजा है। ब्रोकरेज ने गिरावट पर खरीद की रणनीति बरकरार रखी है। जानिए टारगेट प्राइस और बाकी डिटेल।
Silver Price Outlook: दिग्गज ब्रोकरेज मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड का कहना है कि 2025 में चांदी की कीमतों में 160 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखने को मिला। इस दौरान इंटरनेशनल मार्केट में COMEX पर चांदी $75 प्रति औंस के पार निकल गई, जबकि घरेलू बाजार में इसके भाव ₹2.3 लाख प्रति किलो से ऊपर पहुंच गए।
ब्रोकरेज का कहना है कि यह तेजी किसी शॉर्ट-टर्म सट्टेबाजी का नतीजा नहीं है, बल्कि ग्लोबल सिल्वर मार्केट में आए स्ट्रक्चरल बदलाव को दिखाती है।
सप्लाई की कमी बनी तेजी की असली वजह
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट 'Silver Unchained!!!' के मुताबिक, चांदी की इस ऐतिहासिक रैली के पीछे कई मजबूत कारण हैं। इनमें लंबे समय से बना फिजिकल सप्लाई डेफिसिट, एक्सचेंजों पर घटते स्टॉक्स, पॉलिसी से जुड़ी पाबंदियां और इंडस्ट्रियल-इन्वेस्टमेंट मांग की मजबूती शामिल है।
2025 लगातार पांचवां साल रहा, जब चांदी के बाजार में सप्लाई की तंगी बनी रही। माइन से मिलने वाली सप्लाई, कुल मांग को पूरा नहीं कर पाई।
COMEX और शंघाई में स्टॉक्स लगातार घटे
पूरे साल COMEX और शंघाई एक्सचेंज पर चांदी के स्टॉक्स में लगातार गिरावट देखने को मिली। COMEX के रजिस्टर्ड स्टॉक्स में तेज कमी आई, जबकि शंघाई की फिजिकल इन्वेंटरी दस साल के निचले स्तर पर पहुंच गई।
इस सप्लाई दबाव का असर यह रहा कि शंघाई स्पॉट प्राइस, COMEX फ्यूचर्स के मुकाबले $5-$8 के प्रीमियम पर ट्रेड करने लगे। इससे यह साफ हुआ कि पारंपरिक आर्बिट्राज सिस्टम पर भारी दबाव बन चुका है।
ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन की अहम भूमिका
चीन दुनिया के सबसे बड़े सिल्वर रिफाइनर्स और नेट इंपोर्टर्स में से एक है। वहां भी इन्वेंटरी में लगातार गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा, जनवरी 2026 से प्रस्तावित एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग नियमों के चलते ग्लोबल सिल्वर फ्लो और सीमित होने की आशंका है। इससे आने वाले समय में सप्लाई और ज्यादा टाइट हो सकती है।
COMEX में ‘वॉल्ट ड्रेन’ संकट
2025 के आखिर में COMEX पर एक तरह का 'वॉल्ट ड्रेन क्राइसिस' देखने को मिला। सिर्फ चार ट्रेडिंग सेशंस के भीतर 60 फीसदी से ज्यादा रजिस्टर्ड सिल्वर डिलीवरी के लिए क्लेम कर ली गई।
इससे फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स और असल में उपलब्ध फिजिकल सिल्वर के बीच बढ़ते अंतर की तस्वीर साफ हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अब पेपर प्राइस और डिलीवर करने योग्य मेटल के बीच का गैप कीमतों को ऊपर ले जाने वाला बड़ा फैक्टर बन चुका है।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं
मोतीलाल ओसवाल में कमोडिटीज रिसर्च हेड नवनीत दमानी (Navneet Damani) का कहना है, '2025 में चांदी की तेजी असली मेटल की कमी से बनी है। फिजिकल डेफिसिट, पॉलिसी से जुड़ी सप्लाई पाबंदियां और सीमित इन्वेंटरी अब कीमतों को तय कर रही हैं। यह ग्लोबल सिल्वर ट्रेडिंग में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव है।'
वहीं, कमोडिटीज एनालिस्ट Manav Modi कहते हैं, 'प्रमुख ट्रेडिंग हब्स पर इन्वेंटरी लगातार घटने और शंघाई व COMEX के बीच आर्बिट्राज कमजोर पड़ने से यह साफ हो गया है कि डिलीवरी के लिए चांदी सीमित है। फिजिकल मार्केट में बना प्रीमियम असली सप्लाई टाइटनेस दिखाता है।'
आगे का आउटलुक और टारगेट
मोतीलाल ओसवाल ने चांदी पर ‘गिरावट पर खरीद’ की रणनीति बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि आने वाले समय में चांदी COMEX पर $77 और घरेलू बाजार में ₹2.46 लाख प्रति किलो तक जा सकती है।
हालांकि, आगे के टारगेट सप्लाई-डिमांड के समीकरण और पॉलिसी से जुड़े नए घटनाक्रमों पर निर्भर करेंगे, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि चांदी का स्ट्रक्चरल बुल रन अभी खत्म नहीं हुआ है।
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