Silver Price: चांदी के गहनों की घटेगी डिमांड, औद्योगिक मांग में होगा इजाफा; जानिए कीमतों पर क्या होगा असर
Silver Price: चांदी ने एक साल में 276% की छलांग लगाई, लेकिन हाल में करेक्शन भी आया है। Geojit की Silver Report बताती है कि 2026 में भी सप्लाई डिफिसिट, मजबूत निवेश मांग और रणनीतिक महत्व कीमतों को सपोर्ट दे सकते हैं। जानिए डिटेल।
ज्वेलरी मांग में 9 प्रतिशत और सिल्वरवेयर में 17 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है।
Silver Price: साल 2026 की शुरुआत में चांदी ने नई ऊंचाई छू ली थी। इसके भाव ने जनवरी में कई ऑल टाइम हाई बनाए। यह 100 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर को भी पार कर गईं। हालांकि इसके बाद चांदी में तेज गिरावट भी आई। इसमें एक महीने के दौरान लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
Geojit Investments Limited की Silver Report के मुताबिक, रिकॉर्ड लेवल से गिरने के बावजूद सालाना आधार पर चांदी की कीमतों में 182 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त बनी हुई है। मुंबई बाजार में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। कीमतें 2,66,535 रुपये प्रति किलो रहीं। यह मासिक आधार पर 21.61 प्रतिशत की गिरावट दिखाती हैं, लेकिन सालाना आधार पर 276 प्रतिशत की मजबूती दिखाती हैं।
लगातार छठा साल सप्लाई घाटे का अनुमान
Silver Institute के अनुमान के मुताबिक, 2026 में भी वैश्विक चांदी बाजार में सप्लाई मांग से कम रहने वाली है। यह लगातार छठा वर्ष होगा जब बाजार में डिफिसिट की स्थिति रहेगी। इस साल करीब 67 मिलियन औंस की कमी रहने का अनुमान है।
ग्लोबल सप्लाई बढ़कर 1.05 बिलियन औंस तक पहुंच सकती है, जो एक दशक का उच्च स्तर होगा। इसमें माइन प्रोडक्शन में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी और रीसाइक्लिंग में 7 प्रतिशत का इजाफा शामिल है। इसके बावजूद कुल मांग ज्यादा रहने से बाजार में तंगी बनी रह सकती है।
मांग में बदलाव, लेकिन स्ट्रक्चरल सपोर्ट कायम
जियोजीत इनवेस्टमेंट की सिल्वर रिपोर्ट बताती है कि 2026 में इंडस्ट्रियल फैब्रिकेशन 2 प्रतिशत घटकर 650 मिलियन औंस के आसपास आ सकता है, जो चार साल का निचला स्तर होगा। सोलर सेक्टर में सिल्वर की खपत में कमी इसका एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर लंबी अवधि की मांग को सहारा दे सकते हैं।
ज्वेलरी मांग में 9 प्रतिशत और सिल्वरवेयर में 17 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। ऊंची कीमतों का असर भारत में ज्यादा देखने को मिल सकता है। चीन में ज्वेलरी मांग मजबूत रह सकती है।
इसके उलट, फिजिकल निवेश मांग 20 प्रतिशत बढ़कर 227 मिलियन औंस तक पहुंचने का अनुमान है। यह तीन साल का उच्च स्तर होगा और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है।
सिल्वर की रणनीतिक अहमियत बढ़ी
चीन ने 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लागू किए हैं। वहीं अमेरिका ने 2025 की USGS क्रिटिकल मिनरल्स सूची में सिल्वर को शामिल किया है।
इन कदमों से सिल्वर की रणनीतिक अहमियत बढ़ गई है। इससे वैश्विक सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है और कीमतों को नीचे की तरफ मजबूत आधार मिल सकता है।
Silver ETF होल्डिंग में सुधार
iShares Silver Trust की फिजिकल होल्डिंग फरवरी में करीब 2 प्रतिशत बढ़ी है। जनवरी में 5.6 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह रिकवरी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कुल होल्डिंग लगभग 508 मिलियन ट्रॉय औंस के आसपास है। ETF में बढ़त को आमतौर पर निवेशकों के भरोसे में सुधार के संकेत के रूप में देखा जाता है।
टेक्निकल तस्वीर क्या कहती है
जियोजीत इनवेस्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिर, शॉर्ट टर्म में लंदन स्पॉट और MCX सिल्वर रेंज बाउंड रह सकते हैं। मीडियम टर्म ट्रेंड हल्का पॉजिटिव है। वहीं, लॉन्ग टर्म आउटलुक स्पष्ट रूप से सकारात्मक बताया गया है।
संभावित ट्रेडिंग रेंज 62 से 100 डॉलर प्रति औंस के बीच मानी गई है। अगर कीमत 80 डॉलर से नीचे जाती है तो शॉर्ट टर्म दबाव बढ़ सकता है।
वहीं, MCX में चांदी का 2,55,000 रुपये प्रति किलो एक महत्वपूर्ण स्तर माना गया है। इसके नीचे निर्णायक ब्रेक होने पर शॉर्ट में कमजोरी दिख सकती है।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो का संकेत
जनवरी में गोल्ड-सिल्वर रेशियो 50 से नीचे चला गया था, जो 2012 के बाद पहली बार हुआ। फिलहाल यह करीब 58.83 के आसपास है। कम रेशियो आम तौर पर यह दिखाता है कि सिल्वर ने गोल्ड के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।
चांदी की आगे की दिशा क्या होगी
जियोजीत इनवेस्टमेंट की सिल्वर रिपोर्ट का मानना है कि 2025 में जिन कारणों से सिल्वर में तेजी आई थी, वे 2026 में भी प्रभावी रह सकते हैं। डिजिटलाइजेशन, एआई विस्तार, डेटा सेंटर की मांग और भू-राजनीतिक तनाव जैसी थीम्स चांदी को सहारा दे सकती हैं। इसके साथ ही अमेरिकी फेड की नीति, डॉलर की चाल और वैश्विक लिक्विडिटी जैसे कारक भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
Disclaimer:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।