SIP Payment: बैंक अकाउंट में बैलेंस कम होने से सिप पेमेंट मिस हो गया है? जानिए इसके क्या नतीजें होंगे

आम तौर पर इनवेस्टर्स के सेविंग्स अकाउंट से सिप में निवेश का पैसा हर महीने अपने आप कट जाता है। इसके लिए म्यूचुअल फंड कंपनी निवेश के वक्त ही इनवेस्टर का एप्रूवल ले लेती हैं। लेकिन, कई बार अकाउंट में बैलेंस कम होने पर सिप का पेमेंट नहीं हो पाता है

अपडेटेड Aug 05, 2025 पर 3:15 PM
Story continues below Advertisement
सिप का पेमेंट मिस होने की एक बड़ी वजह सिप डेबिट डेट और सैलरी क्रेडिट डेट के बीच मिसमैच है।

म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में निवेश के लिए सिप सबसे अच्छा तरीका है। इससे लंबी अवधि में अच्छा फंड तैयार हो जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यूचुअल फंड्स में निवेश से अच्छा रिटर्न तभी मिलता है, जब इसमें लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाए। आम तौर पर इनवेस्टर्स के सेविंग्स अकाउंट से सिप में निवेश का पैसा हर महीने अपने आप कट जाता है। इसके लिए म्यूचुअल फंड कंपनी निवेश के वक्त ही इनवेस्टर का एप्रूवल ले लेती हैं। लेकिन, कई बार अकाउंट में बैलेंस कम होने पर सिप का पेमेंट नहीं हो पाता है।

सिप पेमेंट मिस करने का असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर-अगर किसी निवेशक का SIP पेमेंट बार-बार मिस करता है तो एसेट मैनेजमेंट कंपनी सिप को कैंसल कर सकती है। दूसरा, सिप का पेमेंट मिस करने का असर इनवेस्टर के लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल गोल पर पड़ता है। इनवेस्टर को हर महीने सिप के पेमेंट का पूरा ध्यान रखना चाहिए। शुरुआती कुछ महीनों के पेमेंट के बाद आम तौर निवेशकों को यह याद हो जाता है कि किस फंड में पैसा उसके बैंक अकाउंट से किस दिन कटने वाला है।


सिप पेमेंट मिस करने की वजह

सिप का पेमेंट मिस होने की एक बड़ी वजह सिप डेबिट डेट और सैलरी क्रेडिट डेट के बीच मिसमैच है। अगर सिप का डेबिट डेट सैलरी क्रेडिट डेट के काफी बाद है तो सिप पेमेंट मिस करने का डर बढ़ जाता है। कई बार बैंक मैनडेट में टेक्निकल एरर या बैंक अकाउंट में बदलाव से भी सिप पेमेंट मिस कर जाता है। कई बार इनवेस्टर्स सिप पेमेंट से पहले कोई बड़ा पेमेंट कर देता है, जिससे सिप पेमेंट के लिए अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस नहीं रह जाता है।

समय पर पेमेंट के लिए तरीका

अगर आप नौकरी करते हैं तो आप सिप पेमेंट की डेट सैलरी क्रेडिट डेट के करीब रख सकते हैं। इससे सिप पेमेंट मिस करने का खतरा काफी कम हो जाएगा। इससे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपके बैंक अकाउंट में आपकी सैलरी हर महीने 1 से 5 तारीख को आती है। ऐसे में आपको सिप के पेमेंट के लिए 7 से 10 तारीख के बीच का डेट रखना होगा। एक दूसरा तरीका इनवेस्टमेंट के लिए एक अलग बैंक अकाउंट का इस्तेमाल है। इस अकाउंट में आपको हर महीने सैलरी आते ही सिप का पेमेंट ट्रांसफर कर देना होगा।

यह भी पढ़ें: Jio BlackRock AMC ने लॉन्च किए 5 नए इंडेक्स फंड्स, जानिए इन फंड्स की खास बातें

क्रेडिट स्कोर पर नहीं पड़ता है असर

अगर आपका सिप का कभी पेमेंट मिस हो जाता है तो इसमें चिंता की बात नहीं है। लेकिन, लगातार तीन बार पेमेंट मिस होने पर एसेट मैनेजमेंट कंपनी आपका सिप कैंसिल कर सकती है। लेकिन, इसका असर आपके लॉन्ग टर्म इवेस्टमेंट गोल पर पड़ सकता है। यह भी ध्यान में रखना जरूरी है कि सिप का पेमेंट मिस करने का असर इनवेस्टर के क्रेडिट स्कोर पर नहीं पड़ता है। इसके बावजूद एक्सपर्ट्स को सिप के पेमेंट में इनवेस्टर को गंभीरता बरतने की सलाह देते हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।