Budget 2026 for Taxpayers: ITR में गलती सुधारने को मिलेगा और समय, 31 दिसंबर से बढ़कर हुई 31 मार्च

ITR Revision Deadline Revised in Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग को लेकर टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है। टैक्सपेयर्स को अब आईटीआर में किसी बदलाव को लेकर अधिक समय मिलेगा। जानिए कि अभी यह डेडलाइन कितनी थी और इसे बढ़ाकर वित्त मंत्री ने क्या किया है?

अपडेटेड Feb 01, 2026 पर 1:36 PM
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ITR Revision Deadline Revised in Budget 2026: टैक्स की फाइलिंग में किसी बदलाव को लेकर अब अधिक समय मिलेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री ने इसकी डेडलाइन बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया है जोकि पहले 31 दिसंबर थी।

ITR Revision Deadline Revised in Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने अपने रिकॉर्ड लगातार नवें बजट में इनमक टैक्सपेयर्स को बहुत बड़ी राहत दी है। टैक्सपेयर को अब अपने टैक्स की फाइलिंग में किसी बदलाव को लेकर अधिक समय मिलेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री ने इसकी डेडलाइन बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया है जोकि पहले 31 दिसंबर थी। इससे टैक्सपेयर्स को इनकम की डिटेल्स अपडेट करने, या दाखिल किए गए रिटर्न में नई जानकारी जोड़ने के लिए तीन महीने का समय और मिल जा रहा है। इससे कोई गलती होने जाने की स्थिति में पेनाल्टी का रिस्क कम होगा।

नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल से होगा लागू

केंद्रीय वित्त मंत्री ने अगले वित्त वर्ष 2027 के लिए पेश बजट में कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने ऐलान किया कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। इसे जुलाई 2025 में नोटिफाई किया गया था। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स नियम और फॉर्म जल्द ही नोटिफाई किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि फॉर्म इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि आम नागरिक बिना किसी दिक्कत के उनका पालन कर सकें। इनकम टैक्स एक्ट 2025 रेवेन्यू-न्यूट्रल है। इसमें टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसने सिर्फ डायरेक्ट टैक्स कानूनों को आसान बनाया है। साथ ही नियमों को आसाना बनाया गया है तो मुकदमेबाजी की गुंजाइश को कम किया गया है।


पिछली बार क्या हुआ था बदलाव

पिछले साल के केंद्रीय बजट (2025-26) में सरकार ने सैलरीड कैटेगरी को राहत देने और खर्च करने योग्य आय को बढ़ावा देने को लेकर पर्सनल इनकम टैक्स सिस्टम में अहम बदलाव किए थे। बजट 2025 में नई व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की आय टैक्स फ्री कर दी गई थी। ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलारर सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए यह सीमा ₹12.75 लाख थी। यह मध्यम वर्ग की टैक्स देनदारी को काफी कम करने और उनके हाथों में अधिक पैसा छोड़ने के लिए किया गया था। इससे नए टैक्स सिस्टम के तहत घरेलू खपत, बचत और निवेश को बढ़ावा मिला।

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