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31 मार्च की डेडलाइन से पहले क्रिप्टो इन्वेस्टर ऐसे निपटाएं अपना टैक्स, इन बातों का रखें खास ख्याल

Crypto Tax Filing: भारत सरकर ने लेटेस्ट टैक्स स्ट्रक्चर के तहत, क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर कड़े नियम लागू हैं। क्रिप्टो ट्रेडिंग, स्टेकिंग रिवॉर्ड्स, माइनिंग और एयरड्रॉप्स से होने वाले मुनाफे पर सीधे 30% टैक्स लगता है। साथ ही हर ट्रांजैक्शन पर 1% TDS काटा जाता है। हालांकि, यह आपकी कुल टैक्स देनदारी में एडजस्ट हो जाता है

Abhishek Guptaअपडेटेड Mar 29, 2026 पर 4:03 PM
31 मार्च की डेडलाइन से पहले क्रिप्टो इन्वेस्टर ऐसे निपटाएं अपना टैक्स, इन बातों का रखें खास ख्याल
क्रिप्टो में होने वाले नुकसान को आप किसी अन्य इनकम के साथ सेट-ऑफ नहीं कर सकते

Crypto Investors: भारत में वित्त वर्ष की समाप्ति यानी 31 मार्च करीब है। अगर आपने पिछले साल क्रिप्टो करेंसी में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो टैक्स नियमों का पालन करना आपके लिए बेहद जरूरी है। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA), जिसके तहत क्रिप्टोकरेंसी आती है उसे लेकर सरकार ने नियम पूरी तरह साफ कर दिए है। समय रहते सही जानकारी और रिपोर्टिंग आपको आयकर विभाग के नोटिस और भारी जुर्माने से बचा सकती है। आइए आपको बताते हैं क्या है नियम।

क्रिप्टो टैक्स का क्या है गणित?

भारत के वर्तमान टैक्स ढांचे के तहत, क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर कड़े नियम लागू हैं। क्रिप्टो ट्रेडिंग, स्टेकिंग रिवॉर्ड्स, माइनिंग और एयरड्रॉप्स से होने वाले मुनाफे पर सीधे 30% टैक्स लगता है। साथ ही हर ट्रांजैक्शन पर 1% TDS काटा जाता है। यह आपकी कुल टैक्स देनदारी में एडजस्ट हो जाता है। सबसे जरूरी बात यह है कि क्रिप्टो में होने वाले नुकसान को आप किसी अन्य आय के साथ सेट-ऑफ नहीं कर सकते। यानी अगर एक कॉइन में फायदा और दूसरे में नुकसान हुआ, तो आपको सिर्फ फायदे वाले हिस्से पर टैक्स देना होगा।

कैसे जानें कितना देना है टैक्स?

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