कभी-कभी एरियर (बकाया रकम) मिलने या अतिरिक्त पेमेंट की वजह से टैक्स लाइबिलिटी बढ़ जाती है। दरअसल, एरियर या अतिरिक्त इनकम को किसी शख्स की मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की कुल इनकम में जोड़ने पर उसका टैक्स भी ज्यादा हो जाता है। ये एरियर सैलरी, पेंशन, रेंट या किसी अन्य आय हो सकते हैं जिसे वास्तव में पहले के वर्षों में मिलना था, लेकिन उसे उस वक्त रोक दिया गया।
