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EPF Vs VPF: रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाने का क्या है स्मार्ट तरीका? EPF और VPF में जानिए फर्क

EPF Vs VPF: रिटायरमेंट के बाद तनावमुक्त जीवन जीने का सपना हर नौकरीपेशा व्यक्ति का होता है। इसके लिए स्मार्ट बचत जरूरी है, और यहां ईपीएफ (एम्प्लॉयी प्रॉविडेंट फंड) व वीपीएफ (वॉलंटरी प्रॉविडेंट फंड) जैसे विकल्प उजागर हो रहे हैं। ये दोनों सरकारी समर्थित योजनाएं लंबी अवधि की बचत को बढ़ावा देती हैं, लेकिन इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं जो निवेशकों को सही फैसला लेने में मदद करते हैं।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Feb 05, 2026 पर 2:50 PM
EPF Vs VPF: रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाने का क्या है स्मार्ट तरीका? EPF और VPF में जानिए फर्क

रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा हर व्यक्ति की सबसे बड़ी चिंता होती है। नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और स्वैच्छिक भविष्य निधि (VPF) दो ऐसे विकल्प हैं जो न सिर्फ बचत की आदत डालते हैं बल्कि लंबे समय में मजबूत वित्तीय सहारा भी बनते हैं। अक्सर लोग यह समझने में उलझ जाते हैं कि EPF और VPF में अंतर क्या है और किसे चुनना बेहतर होगा।

EPF क्या है?

EPF यानी Employee Provident Fund एक अनिवार्य बचत योजना है जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं। कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12% हिस्सा EPF में जाता है। उतनी ही राशि नियोक्ता भी जमा करता है। यह रकम ब्याज सहित रिटायरमेंट तक जमा होती रहती है। EPF का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सरकारी गारंटी वाली सुरक्षित योजना है और इसमें मिलने वाला ब्याज टैक्स-फ्री होता है।

VPF क्या है?

VPF यानी Voluntary Provident Fund, EPF का ही विस्तार है। इसमें कर्मचारी अपनी इच्छा से 12% से अधिक योगदान कर सकता है। यानी अगर कोई व्यक्ति ज्यादा बचत करना चाहता है तो वह अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा VPF में डाल सकता है। इसमें भी वही ब्याज दर मिलती है जो EPF में मिलती है। फर्क सिर्फ इतना है कि VPF पूरी तरह से कर्मचारी की स्वेच्छा पर आधारित है।

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