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UPI पर फीस से किसकी भरेगी तिजोरी? PhonePe, GPay और बैंकों में कैसे बंटेगा हिस्सा, जानें

UPI MDR Charges: 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर 0.40% MDR चार्ज लागू होने जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस कटौती से किसकी तिजोरी भरेगी? जानिए PhonePe, GPay और बैंकों में कैसे बंटेगी कमाई और आम ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा

Abhishek Guptaअपडेटेड Sep 16, 2026 पर 10:27 AM
UPI पर फीस से किसकी भरेगी तिजोरी? PhonePe, GPay और बैंकों में कैसे बंटेगा हिस्सा, जानें
रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल के अनुसार, कुल 0.40% MDR चार्ज का 70% हिस्सा अकेले बैंकिंग सेक्टर की जेब में जाएगा

UPI MDR Charges: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन (P2M) पर 0.40% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का ऐलान कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस नई फीस से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा, ऐप्स को या फिर बैंकों को?

देश के UPI मार्केट पर Google Pay और PhonePe का एकछत्र राज है। करीब 90% UPI पेमेंट इन्हीं दो ऐप्स के माध्यम से की जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई व्यवस्था में असली बाजी बैंकों के हाथ लगी है। आइए आपको बताते हैं कि हर ट्रांजेक्शन पर कटने वाले इस पैसे का बंटवारा कैसे होगा और आम जनता व दुकानदारों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

किसे मिलेगा कितना हिस्सा?

NPCI द्वारा तय किए गए रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल के अनुसार, कुल 0.40% MDR चार्ज का 70% हिस्सा अकेले बैंकिंग सेक्टर की जेब में जाएगा।

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