Why Gold-Silver Rebound: पिछले दो कारोबारी सत्रों में तेज गिरावट के बाद आज सोने और चांदी के भाव में तेज रिकवरी आई। इसकी वजह ये है कि ट्रेडर्स ने अमेरिकी रोजगार के आंकड़े नहीं आने, अमेरिकी शटडाउन से जुड़ी अनिश्चितता और फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर बदलती उम्मीदों के बीच अपनी पोजिशन का दोबारा एसेसमेंट किया। इसके चलते स्पॉट गोल्ड प्रति औंस 3.7% चढ़कर $4,837.16 पर पहुंच गया जबकि पिछले कारोबारी दिन में यह एक महीने के निचले स्तर पर आ गया था। अप्रैल डिलीवरी का अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 4.5% बढ़कर $4,859.30 पर बंद हुआ। इससे पहले पिछले गुरुवार 29 जनवरी को गोल्ड प्रति औंस $5,594.82 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था लेकिन उसके बाद तेज करेक्शन के चलते दो ही दिनों में इसकी कीमतें करीब 13% गिर गई थी। गोल्ड ही नहीं, चांदी की भी चमक बढ़ी है। स्पॉट सिल्वर 5.9% उछलकर प्रति औंस $84.09 पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले हफ्ते यह $121.64 प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा था।
क्यों बढ़ी सोने-चांदी की चमक?
बाजार के जानकारों के मुताबिक सोने और चांदी में रिकवरी की मुख्य वजह फंडामेंटल में किसी नए बदलाव की बजाय पोज़िशन अनवाइंडिंग और टेक्निकल रिकवरी रही। चूंकि अमेरिकी शटडाउन के चलते जनवरी में अमेरिकी रोजगार से जुड़ी रिपोर्ट नहीं आई तो मार्केट को नए आर्थिक संकेत नहीं मिले और ट्रेडिंग ज्यादातर हेडलाइंस और पोजिशनिंग फ्लो पर निर्भर रही। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी गोल्ड पर दबाव बनाया। अमेरिकी डॉलर को पॉजिटिव इकनॉमिक आंकड़ों और फेड नीति को लेकर बदलती उम्मीदों से सपोर्ट मिला।
आमतौर पर डॉलर की मजबूती से गोल्ड पर दबाव पड़ता है क्योंकि इससे अमेरिका से बाहर के खरीदारों के लिए यह महंगा हो जाता है, लेकिन मैक्रो लेवल पर व्यापक अनिश्चितता के चलते यह असर संतुलित हो गया। वहीं फेडरल रिजर्व की बात करें तो निवेशकों को इस साल 2026 में फेडरल रिजर् से कम से कम दो बार ब्याज दरों में कटौती के ऐलान की उम्मीद है। इससे गोल्ड को सपोर्ट मिलता है क्योंकि इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता है। इसके अलावा कमोडिटी मार्केट की नजर भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील पर भी है।
गोल्ड को लेकर क्या है स्थिति?
वेंचुरा के कमोडिटी हेड और सीआरएम एनएस रामास्वामी का कहना है कि गोल्ड की हालिया गिरावट इसके तेजी के रुझान के समाप्त होने का संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो गिरावट आई थी, वह सिर्फ अत्यधिक पोजिशनिंग और स्पेक्यूलेटिव एक्टिविटी के चलते थी, न कि किसी फंडामेंटल वजह के। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल 2026 में गोल्ड अपने हालिया फ्यूचर्स हाई $5,645 प्रति औंस के लेवल को पार कर जाएगा लेकिन इस दौरान उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। रामास्वामी के मुताबिक इसे चार वजहों से सपोर्ट मिल रहा है- 2025 की चौथी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने 230 टन सोना खरीदा और 2026 में 800 टन से अधिक खरीद की उम्मीद है, ईटीएफ होल्डिंग्स बढ़ रही हैं जिससे निवेश मांग को लगातार सपोर्ट मिल रहा है, जियोपॉलिटिकल और मैक्रो रिस्क ऊंचे बने हुए हैं जिससे पोर्टफोलियो हेज के लिए इसकी मांग बनी हुई है और फिजिकल डिमांड मजबूत है जिससे बाजार टाइट बना हुआ है।
लेकिन चांदी में धीमी रिकवरी के आसार
गोल्ड और चांदी में जब गिरावट आई तो चांदी में फिसलन अधिक रही क्योंकि मार्केट में इसका लेवरेज अधिक था। मार्जिन की जरूरतें बढ़ी तो कुछ ट्रेडर्स को पोजिशन बेचनी पड़ी, जिससे बिकवाली और तेज हो गई। रामास्वामी का अनुमान है कि नियर टर्म में चांदी प्रति औंस $72 से $78 के दायरे में रह सकती है। $80 प्रति औंस से ऊपर टिके रहने पर ही इसमें रिकवरी का स्पष्ट संकेत मिलेगा।
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