Apara Ekadashi 2025: अपरा एकादशी पर विशेष पूजा से मिलेगा शुभ लाभ, जानें मुहूर्त और पारण समय

Apara Ekadashi 2025: ज्येष्ठ माह की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है, जो इस बार विशेष शुभ योगों से भरपूर है। आयुष्मान और प्रीति योग के साथ बुधादित्य राजयोग भी बन रहा है। अपरा एकादशी का व्रत ब्रह्म हत्या जैसे पापों से मुक्ति दिलाने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने में सहायक होता है

अपडेटेड May 14, 2025 पर 11:20 AM
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Apara Ekadashi 2025 : अपरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।

ज्येष्ठ मास की पहली एकादशी तिथि को अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है, जो विशेष रूप से महत्वपर्ण मानी जाती है। ये दिन व्यक्ति को कई लाभ प्रदान करता है और विशेष रूप से ब्रह्म हत्या जैसे गंभीर पापों से मुक्ति दिलाने के लिए प्रसिद्ध है। अपरा एकादशी के व्रत से जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति का वास होता है। इस दिन बनते हैं कई शुभ योग जैसे आयुष्मान योग और प्रीति योग, जो पूजा के महत्व को और भी बढ़ा देते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।

ये एकादशी व्यक्ति की समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति को बढ़ाने में मदद करती है। इसलिए अपरा एकादशी का व्रत करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

अपरा एकादशी की तिथि


इस बार अपरा एकादशी का आरंभ 22 मई को रात 1 बजकर 13 मिनट पर होगा और समाप्ति 23 मई को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगी। इसलिए अपरा एकादशी का व्रत 23 मई, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन बुधादित्य राजयोग भी बन रहा है, जो पूजा के महत्व को और बढ़ा देता है।

अपरा एकादशी व्रत और पूजा विधि

व्रत की शुरुआत

भगवान विष्णु और सूर्यदेव को ध्यान करके जल अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें।

सात्विक भोजन

एकादशी व्रत से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें और संयम रखें।

पूजा स्थल की तैयारी

पूजा स्थल को स्वच्छ करें।

एक लकड़ी की चौकी पर पीले रंग के वस्त्र रखें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की तस्वीरें रखें।

पूजा की विधि

पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अभिषेक करें और उन्हें फूल अर्पित करें।

फिर भगवान और माता लक्ष्मी को मीठे पकवानों का भोग अर्पित करें।

एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।

आरती और प्रसाद वितरण

अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद वितरण करें।

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