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Chaitra Navratri 2026 Vrat Rules: प्रतिपदा और अष्टमी को रखते हैं व्रत तो जान लें ये जरूरी नियम, पालन नहीं करने पर अधूरी मानी जाती है पूजा

Chaitra Navratri 2026 Vrat Rules: चैत्र मास की नवरात्रि शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं। इस नवरात्रि में भी मां दुर्गा के बहुत से भक्त व्रत करते हैं। जो लोग प्रतिपदा और अष्टमी का व्रत करते हैं, उन्हें इसके जरूरी नियमों को जान लेना चाहिए, क्योंकि इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 07, 2026 पर 7:00 AM
Chaitra Navratri 2026 Vrat Rules: प्रतिपदा और अष्टमी को रखते हैं व्रत तो जान लें ये जरूरी नियम, पालन नहीं करने पर अधूरी मानी जाती है पूजा
चैत्र नवरात्रि का व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है।

Chaitra Navratri 2026 Vrat Rules: चैत्र नवरात्रि का व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार ये हिंदू वर्ष की पहली नवरात्रि होती है, जिसमें भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। नौ दिनों की इस अवधि में भक्त सच्चे मन और पूरी आस्था के साथ उपवास करते हैं और सात्विक जीवन जीते हैं। कुछ भक्त जहां पूरे नौ दिनों का उपवास करते हैं, लेकिन जो भक्त पूरे 9 दिन उपवास नहीं कर पाते हैं, वे प्रतिपदा और अष्टमी तिथि को व्रत करते हैं। आइए जानते हैं कि ऐसे लोगों के लिए चैत्र नवरात्रि व्रत के नियम क्या हैं? यदि इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो आपको उपवास का पूरा फल नहीं मिलेगा.

चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा और अष्टमी व्रत के नियम

  • जो लोग चैत्र नवरात्रि के पहले और अष्टमी को व्रत रखते हैं, उसे शुरुआत और अंत का व्रत या युग्म व्रत कहा जाता है। इसके लिए भी आपको कठिन नियमों का पालन करना होता है।
  • चैत्र नवरात्रि के पहले दिन यानि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर हाथ में अक्षत्, लाल फूल और जल लेकर चैत्र नवरात्रि व्रत और मां दुर्गा की पूजा का संकल्प करें।
  • चैत्र नवरात्रि व्रत और पूजा का संकल्प लेने के बाद आप कलश स्थापना करें और वहां पर अखंड ज्योति जलाएं। यदि कलश स्थापना संभव नहीं है तो पूजा स्थान पर मां दुर्गा के लिए एक अखंड ज्योति जलाएं। यह भी कर पाना मुश्किल हो तो सुबह और शाम की पूजा के समय घी का दीपक जलाएं।
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