Chitragupt Pooja 2025: दिवाली से चित्रगुप्त पूजा तक कलम बंद रखते हैं कायस्थ, जानिए इसकी मान्यता और पौराणिक कारण

Chitragupt Pooja 2025: चित्रगुप्त भगवान को कायस्थ समाज का इष्टदेव माना जाता है। इनकी पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज के दिन की जाती है। इनकी पूजा से पहले दिवाली की रात से कायस्थ समाज के लोग कलम बंद कर देते हैं। आइए जानें इसका पौराणिक मान्यता और कारण

अपडेटेड Oct 22, 2025 पर 7:54 PM
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भगवान चित्रगुप्त संसार के सभी प्राणियों का लेखा-जोखा रखते हैं और उन्हें कर्मों के हिसाब से फल देते हैं।

Chitragupta Puja 2025: चित्रगुप्त पूजा साल में दो बार मनाई जाती है। एक बार होली के बाद हिंदू माह चैत्र में और फिर दिवाली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को। कार्तिक मास की चित्रगुप्त पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि माना जाता है कि भगवान चित्रगुप्त इसी दिन प्रकट हुए थे। कायस्थ समाज के इष्टदेव भगवान चित्रगुप्त संसार के सभी प्राणियों का लेखा-जोखा रखते हैं और उन्हें कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। कायस्थ समाज के लोग कार्तिक शुक्ल की द्वितीया तिथि का बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं। इस पूजा के साथ एक परंपरा जुड़ी है, जिसके तहत ये लोग दीपावली की रात को अपनी कलम बंद कर देते हैं और फिर पूरे 24 घंटे के बाद यानी दूज के दिन चित्रगुप्त भगवान की पूजा करने के बाद ही कामकाज शुरू करते हैं। इसके पीछे एक पौराणिक और रोचक कारण है, जिसके प्रतीक स्वरूप ये परंपरा चली आ रही है। आइए जानें इसके बारे में

प्रभु श्रीराम के राज तिलक का नहीं मिला निमंत्रण

दीपावली पांच दिनों का पर्व है, जिसके अंतिम दिन चित्रगुप्त पूजा और भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम जब लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या पहुंचे। भगवान राम के अयोध्या आगमन के प्रतीक के रूप में हर साल दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार जब प्रभु राम लंका विजय के बाद अयोध्या पहुंचे, तब उनका राजतिलक किया गया। इस विशेष अवसर के लिए अयोध्या के राजा भरत ने गुरु वशिष्ठ को भगवान राम के राजतिलक के लिए सभी देवी देवताओं को निमंत्रण भेजने का कार्यभार सौंपा। गुरु वशिष्ठ ने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा लेकिन वह भगवान चित्रगुप्त को निमंत्रण देना भूल गए। राजतिलक में सभी देवी-देवता मौजूद थे, लेकिन चित्रगुप्त भगवान कहीं नजर नहीं आ रहे थे तो राजा भरत को बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने गुरु वशिष्ठ से इसके बारे में पूजा, तब भेद खुला कि वशिष्ठ जी भगवान चित्रगुप्त को निमंत्रण देना ही भूल गए थे।

24 घंटे तक नहीं उठाई कलम

भगवान चित्रगुप्त प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का निमंत्रण नहीं मिलने से नाराज हो गए और अपने कलम को बंद कर दिया। उन्होंने 24 घंटे तक कलम नहीं उठाई। सभी देवी-देवताओं ने देखा कि स्वर्ग और नरक के सारे काम रुक गए हैं, लेखा-जोखा कर पाना मुश्किल हो गया है। तब गुरु वशिष्ठ ने भगवान चित्रगुप्त से क्षमा मांगी और भगवान राम ने भी भगवान चित्रगुप्त से आग्रह किया तब भगवान चित्रगुप्त ने एक दिन बाद अपनी कलम उठाई। इसी घटना के प्रतीक के रूप में कायस्थ समाज के लोग दीपावली की रात को अपनी कलम बंद कर रख देते हें। दीपावली के एक दिन बाद यम द्वितीया के दिन कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा आराधना करने के बाद फिर कलम से कामकाज शुरू करते हैं।

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