दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा का पर्व आस्था, कृतज्ञता और प्रकृति के सम्मान का प्रतीक है। ये दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान ने ब्रजवासियों को इंद्रदेव के प्रकोप से बचाया था। तभी से श्रद्धालु इस दिन अन्नकूट का भोग लगाते हैं और गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं। इस पर्व का संदेश है कि हमें प्रकृति, अन्न और पशुओं का आदर करना चाहिए, क्योंकि ये हमारी जीवन-रेखा हैं। उत्तर भारत के मथुरा, वृंदावन, बरसाना और गोकुल जैसे क्षेत्रों में ये पर्व खास श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
