Holashtak 2026: होलाष्टक के 8 दिनों में नहीं करने चाहिए ये काम, जानें क्या करें और क्या न करें?

Holashtak 2026: होलाष्टक रंगो वाली होली से पहले के आठ दिनों की अवधि को बोला जाता है। इसमें नकारात्मक शक्तियों की ऊर्जा बढ़ जाती है। इस अवधि में शुभ काम और नया काम करने की मनाही होती है। आइए जानें इस साल होलाष्टक कब से लग रहे हैं और इसमें क्या करें और क्या न करें

अपडेटेड Feb 20, 2026 पर 7:00 AM
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राजा हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को आठ दिन तमाम तरह की यातनाएं दी थीं।

Holashtak 2026: हिंदू धर्म में शुभ और अशुभ काम दोनों करने से पहले ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति, योग और शुभ-अशुभ काल का विचार किया जाता है। साल में और कई पर दिन में कुछ अवधि ऐसी होती है, जिसमें शुभ काम करने की मनाही होती है। इनमें से एक है होलाष्टक। इसकी शुरुआत रंगों के पर्व होने से ठीक आठ दिन पहले होती है। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में शुभ और नया काम नहीं किया जाता है। माना जाता है कि इस अवधि में नकारात्मक शक्तियां हावी रहती हैं, जो शुभ कार्यों में विघ्न डालती हैं। इस अवधि में शुभ या नया काम करने से उसका नकारात्मक परिणाम आने का खतरा रहता है। इस समय साधना, भक्ति और मानसिक शांति पर ध्यान देना चाहिए। आइए जानें इस साल होलाष्टक कब से शुरू हो रहे हैं और इन 8 दिनों में क्या करना चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए।

24 फरवरी से शुरू होगा होलाष्टक

पंचांग के अनुसार होलाष्टक की शुरुआत, फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होता है। ऐसे में इस तिथि की शुरुआत 24 फरवरी को सुबह 7 बजकर 2 मिनट से हो रही है। इसके चलते होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से होगी। वहीं, इसका समापन 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के दिन होगा।

होलाष्टक में ये करना है शुभ

शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक के 8 दिन दान-पुण्य, ध्यान, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही इस समय भगवान विष्णु, शिव, राम या हनुमान जी की आराधना करना भी बेहद फलदायी मानी जाती है।

होलाष्टक के 8 दिन क्या न करें?


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में मांगलिक कार्य बिलकुल नहीं करना चाहिए।

  • विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन जैसे 16 संस्कार न करें।
  • नया घर, दुकान या वाहन न खरीदें और न ही बेचें।
  • जमीन से जुड़ी डील और निर्माण कार्य न शुरू करवाएं।

होलाष्टक से जुड़ी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार होलाष्टक का संबंध प्रहलाद और राजा हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि होलिका दहन से ठीक आठ दिन पहले तक राजा हिरण्यकश्यप ने भगवान श्री विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को तमाम तरह की यातनाएं दी थीं। प्रहलाद की बुआ थीं होलिका, जिन्हें अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। जब होलिका प्रह्लाद लेकर जलती हुई अग्नि में बैठीं तो होलिका तो जल गई लेकिन प्रहलाद बच गए। यही कारण है कि यातना भरे उन आठ दिनों को सनातन परंपरा में अशुभ माना जाता है।

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