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Jagannath Rath Yatra 2025: रथ यात्रा से पहले भगवान को लगेगा बुखार, जानें स्नान उत्सव से जुड़ी परंपरा

Jagannath Rath Yatra 2025: भगवान जगन्नाथ का प्राकट्य उत्सव और स्नान यात्रा 11 जून को है। इस विशेष स्नान के बाद वे 15 दिनों के लिए बीमार हो जाते हैं और किसी को दर्शन नहीं देते। रथ यात्रा से पहले उनका यह एकांतवास अनासर काल कहलाता है। आइए जानते हैं, आखिर भगवान इस दौरान बीमार क्यों पड़ते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 11, 2025 पर 8:50 AM
Jagannath Rath Yatra 2025: रथ यात्रा से पहले भगवान को लगेगा बुखार, जानें स्नान उत्सव से जुड़ी परंपरा
Jagannath Rath Yatra 2025: अनासर काल के दौरान आषाढ़ कृष्ण पंचमी को "अनासर पंचमी" मनाई जाती है।

पुरी, ओडिशा स्थित श्रीजगन्नाथ धाम एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंग चुका है। हर वर्ष की तरह इस बार भी भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को बड़े धूमधाम से निकाली जाएगी। ये यात्रा धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद खास मानी जाती है। रथ यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विशाल रथों पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से निकलते हैं और गुंडिचा मंदिर तक की यात्रा करते हैं। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से पुरी पहुंचकर रथ खींचने और भगवान के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

माना जाता है कि इस पवित्र यात्रा में भाग लेने मात्र से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि रथ यात्रा के दौरान पुरी का माहौल भक्तिमय उत्सव में बदल जाता है।

कब शुरू होती है रथ बनाने की प्रक्रिया?

इस भव्य यात्रा की तैयारी साल भर पहले शुरू हो जाती है। वसंत पंचमी के शुभ दिन पर रथ निर्माण के लिए लकड़ी की कटाई की जाती है और मकर संक्रांति के दिन से रथ बनाना शुरू हो जाता है। इन रथों को पारंपरिक विधि और खास किस्म की लकड़ियों से तैयार किया जाता है।

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