Magha Saptami 2026: माघ सप्तमी का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इसे अचला सप्तमी, रथ सप्तमी और आरोग्य सप्तमी आदि नामों से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था। माना जाता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व आक और बेर के पत्तों के साथ स्नान करने से मनचाही इच्छा पूरी होती है।
माघ का महिना हिंदू धर्म के सबसे पवित्र मासों में से एक माना जाता है। इसी माह में माघ मेला और कल्पवास जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। माघ के महीने में ही शिशिर नवरात्रि यानी गुप्त नवरात्रि भी आती है। माना जाता है कि इस माह में गंगा स्नान करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और हर बीमारी से मुक्ति मिलती है।
माघ मास में आने वाली माघ सप्तमी के व्रत का बहुत महत्व है। पूर्णिया के पंडित मनोत्पल झा ने नेटवर्क 18 को बताया कि महीना के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से आरोग्य, धन, ऐश्वर्य और सुख संपदा की प्राप्ति होती है। आइए जानें इस साल ये पर्व किस दिन मनाया जाएगा और इस दिन आक और बेर के पत्तों से स्नान का क्या महत्व है?
माघ मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 24 जनवरी, शनिवार को रात में 12 बजकर 40 मिनट पर प्रारम्भ होकर 25 जनवरी, रविवार को रात 11 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार, 25 जनवरी को रथ सप्तमी मनाया जाएगा।
माघ सप्तमी के दिन स्नान मुहूर्त – सुबह 05:26 बजे से सुबह 07:13 बजे तक
सूर्य देव की पूजा का शुभ मुहूर्त - सुबह 11 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर के 12 बजकर 33 मिनट तक
माघ सप्तमी के दिन सूर्योदय- सुबह 06:48 बजे
माघ सप्तमी सूर्य पूजा मंत्र
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥
आक और बेर के पत्तों से स्नान का महत्व
माघी सप्तमी में आक और बेर के पत्ते से स्नान का भी महत्व है। आक के पत्तों को लोग मदार और अर्क के नाम से भी जानते हैं। पंडित मनोत्पल झा ने कहा कि भगवान सूर्य को ये पत्ता बहुत पसंद है, इसलिए उनके जन्मोत्सव के मौके पर अर्क और बेर के पत्ता से लोग स्नान करते हैं। इससे जुड़े वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बारे में उन्होंने बताया कि अर्क के पत्तों में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं और बेर के पत्तों में भी औषधीय गुण होते हैं। मान्यता है कि माघी सप्तमी में लोग इन पत्तों को अपने सिर और पैर के निचले हिस्सों में दबाकर पानी से स्नान करते हैं तो इन पत्तों से होकर वह पानी पूरे शरीर में पहुंचता है। इससे शरीर के त्वचा संबंधी कई रोगों का नाश होता है। इन पत्तों को सिर पर, हाथ में, कंधे पर और तलवे के नीचे रखकर स्नान करने से त्वचा संबंधी बीमारी खत्म होती है।