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Makar Sankranti 2026: दो दिन मनाया जाएगा मकर संक्रांति का पर्व, दुर्लभ संयोग में होगा स्नान और दान

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। यह पर्व हर साल 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति दो दिन मनाई जाएगी और इस दिन दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें स्नान-दान होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 26, 2025 पर 4:15 PM
Makar Sankranti 2026: दो दिन मनाया जाएगा मकर संक्रांति का पर्व, दुर्लभ संयोग में होगा स्नान और दान
इस साल ग्रहों की स्थिति और मान्यताओं के देखते हुए मकर संक्रांति का पर्व दो दिन मनाया जाएगा।

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सूर्य के धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास की अवधि समाप्त हो जाती है और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने पर खरमास शुरू होता है। इस दिन का धार्मिक दृष्टि से महत्व होने के साथ ही आध्यात्मिक नजरिए ये भी बहुत अहम माना जाता है। इस दिन के बाद से ही सूर्य उत्तरायण होते हैं, इस दिन इस त्योहार का एक नाम उत्तरायण भी है। ये पर्व देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। ये पर्व ऋतु परिवर्तन और कृषि उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस साल ग्रहों की स्थिति और मान्यताओं के देखते हुए ये पर्व दो दिन मनाया जाएगा। इसके अलावा इस दिन दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जिसमें स्नान-दान बहुत पुण्य फल देने वाला माना जा रहा है। आइए जानें

2026 मकर संक्रांति तारीख

पंचांग के अनुसार, सूर्य देव जिस समय धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे, वही मकर संक्रांति का क्षण होगा। सूर्य देव 14 जनवरी 2026 को दिन बुधवार को दोपहर 03:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

महा पुण्य काल

14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का महा पुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से लेकर शाम 04:58 बजे तक है। यह अवधि 1 घंटे 45 मिनट तक रहेग। वहीं, मकर संक्रांति का पुण्य काल दोपहर में 03:13 बजे से शाम 05:45 बजे तक है। पुण्य काल 2 घंटे 32 मिनट तक है। मकर संक्रांति के स्नान के लिए महा पुण्य काल, उसके बाद पुण्य काल अच्छा माना जाता है।

मकर संक्रांति के साथ होगी षट्तिला एकादशी

इस बार मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी पर षटतिला एकादशी व्रत का संयोग बन रहा है। ऐसा संयोग कई दशकों में एक बार बनता है। मकर संक्रांति पर एकादशी का संयोग होने से ये दिन और भी खास हो गया है। षटतिला एकादशी पर तिल का उपयोग 6 कामों में किया जाता है, इसलिए इसे षटतिला एकादशी कहते हैं।

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