Get App

Paush Putrada Ekadashi 2025: साल की आखिरी एकादशी व्रत करने के ये हैं 4 फायदे, जानें साल की आखिरी एकादशी की तारीख, मुहूर्त और नियम

Paush Putrada Ekadashi 2025: पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी व्रत किया जाता है। यह व्रत साल में दो बार किया जाता है। सभी नियमों का पालन करते हुए और श्रद्धापूर्वक ये व्रत करने वाले भक्तों को 4 फायदे मिलते हैं। आइए जानें कब है ये व्रत और क्या हैं ये फायदे

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 26, 2025 पर 2:54 PM
Paush Putrada Ekadashi 2025: साल की आखिरी एकादशी व्रत करने के ये हैं 4 फायदे, जानें साल की आखिरी एकादशी की तारीख, मुहूर्त और नियम
पौष माह की पुत्रदा एकादशी शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को होती है।

Paush Putrada Ekadashi 2025: पौष पुत्रदा एकादशी पूरे साल में आने वाली 24 एकादशियों में से एक है। इस तिथि को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पवित्र तिथि माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा और व्रत किया जाता है। इस दिन संतान की सुख-समृद्धि और उनकी तरक्की की कामना की जाती है। नि:संतान माताएं संतान प्राप्ति का आशीर्वाद पाने के लिए ये व्रत करती हैं। ये पौष माह की पुत्रदा एकादशी है, जो इस माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को होती है। इससे पहले सावन के महीने में पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। पुत्रदा एकादशी व्रत को करने वाले भक्तों को चार बहुत महत्वपूर्ण फायदे मिलते हैं। आइए जानें इनके बारे में

कब है पौष पुत्रदा एकादशी

पंचांग के अनुसार, पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 30 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर होगी और इस एकादशी तिथि का समापन 31 दिसंबर को प्रात:काल 05 बजे हो जाएगा। पुत्रदा एकादशी व्रत इस साल 30 और 31 दिसंबर दो दिन रखा जाएगा। गृहस्थ जीवन के लोग 30 दिसंबर को एकादशी का व्रत रखेंगे। वहीं, वैष्णव परंपरा को मानने वाले लोग 31 दिसंबर को इसका व्रत रखेंगे।

पौष पुत्रदा एकादशी शुभ मुहूर्त

पौष पुत्रदा एकादशी के दिन 30 दिसंबर को पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 पर शुरू होगा। ये मुहूर्त 06 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में स्नान के बाद पूजा करना सबसे उत्तम होगा। वहीं, इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत करने के 4 फायदे

नि:संतान दंपतियों के लिए वरदान : यह व्रत संतान सुख से वंचित दंपति के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस दिन श्रीकृष्ण के 'बाल स्वरूप' (लड्डू गोपाल) की पूजा की जाती है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें