Paush Putrada Ekadashi 2025: 30 या 31 दिसंबर किस दिन होगा पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें सही तारीख, मुहूर्त और विधि

Paush Putrada Ekadashi 2025: पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। ये साल 2025 का आखिरी एकादशी व्रत होगा। इसकी सही तिथि को लेकर भ्रम हो रहा है। आइए जानें इसकी सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि क्या रहेगी

अपडेटेड Dec 23, 2025 पर 7:00 AM
Story continues below Advertisement
पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 और 31 दिसंबर दोनों ही दिन रखा जाएगा।

Paush Putrada Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में कुछ तिथियों की विशेष मान्यता है। इनमें से एक है एकादशी तिथि का व्रत। समस्त सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित ये व्रत हिंदू वर्ष में 24 बार आता है। चंद्र माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। इन्हीं में से एक पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इसे पौष पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह व्रत भी साल में दो बार आता है, सावन में और पौष में। यह व्रत संतान की खुशहाली और तरक्की की कामना से किया जाता है। नि:संतान दंपति या महिलाएं इसे संतान प्राप्ति की इच्छा से भी करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। आइए जानते हैं कि साल 2025 की आखिरी एकादशी कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

पौष पुत्रदा एकादशी व्रत तारीख

पुत्रदा एकादशी की तारीख को लेकर लोगों में असमजंस है, कि इसे 30 दिसंबर को रखना सही होगा या 31 दिसंबर को। पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 और 31 दिसंबर दोनों ही दिन रखा जाएगा। गृहस्थ पहले दिन एकादशी का व्रत करेंगे, जबकि वैष्णव संप्रदाय दूसरे दिन एकादशी का उपवास करेंगे।

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 31 दिसंबर 2025 को सुबह 5 बजे होगा।

पारण का समय


पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर को करने वाले भक्त 31 दिसंबर 2025 को पारण करेंगे। पारण के लिए शुभ मुहूर्त 31 दिसंबर को दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। वहीं वैष्णव परंपरा को मानने वाले जो लोग 31 को एकादशी का व्रत रखेंगे, वे अगले दिन 01 जनवरी 2026 प्रात:काल 07:14 से 09:18 बजे के बीच पारण कर सकेंगे।

पूजा विधि

इस दिन सुबह स्नान-ध्यान करें। तन और मन से पवित्र होने के बाद एकादशी व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की हल्दी, चंदन, केसर आदि का तिलक लगाकर पूजा शुरू करें। उन्हें फल-फूल, धूप-दीप आदि अर्पित करें। एकादशी व्रत में श्री हरि की कथा को पढ़ने और सुनने का बहुत ज्यादा महत्व है, इसलिए पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु का गुणगान करने वाली कथा का पाठ करें। पूजा के अंत में श्री हरि की आरती करें और अधिक से अधिक लोगों को प्रसाद बांटने के बाद स्वयं भी ग्रहण करें। इस व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता है, इसलिए सिर्फ फलाहार करें। व्रत के अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।

Kalpvas 2026: तन और मन की शुद्धि का मार्ग है कल्पवास, जानें इसका महत्व और और अर्थ

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।