ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद पावन और श्रद्धा से भरा अवसर होता है। ये व्रत विशेष रूप से पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन महिलाएं वट वृक्ष (बरगद) की पूजा करती हैं, क्योंकि ये पेड़ स्थायित्व और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन सावित्री ने अपने तप, श्रद्धा और प्रेम से अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस पाया था, इसलिए ये व्रत पति-पत्नी के अटूट संबंध और समर्पण का प्रतीक है।
