भारत और न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज की शुरुआत 11 जनवरी से हो रही है। वहीं भारत के पूर्व बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने कहा कि वनडे टीम में टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों के रनों को जरूरत से ज्यादा महत्व देना सही नहीं है। उनके मुताबिक, टेस्ट क्रिकेट की तुलना में वनडे में बल्लेबाजी करना आसान होता है, इसलिए दोनों फॉर्मेट के प्रदर्शन को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए। अपनी बात को मजाक में समझाते हुए संजय मांजरेकर ने सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली का एग्जांपल दिया।
मांजरेकर ने कहा, वनडे क्रिकेट में भारत के नियमित ओपनर ऊपर के नंबर पर टिके रहने के लिए काफी एक्साइटमेंट रहते हैं, जबकि टेस्ट क्रिकेट में वही खिलाड़ी चौथे, पांचवें या छठे नंबर पर बल्लेबाजी करके भी संतुष्ट रहते हैं। दोनों फॉर्मेट की परिस्थितियां और चुनौती अलग-अलग होती हैं, इसलिए आंकड़ों की तुलना करते समय यह फर्क समझना जरूरी है।
स्पोर्ट्सकीड़ा के हवाले से इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में संजय मांजरेकर ने कहा, "उनसे कई लोग पूछते हैं कि वह बार-बार क्यों कहते हैं कि वनडे क्रिकेट टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों के लिए आसान होता है। इंडियन क्रिकेट में कुछ साल पीछे जाकर देखा जाए, तो जो खिलाड़ी लंबे समय तक 50 ओवर के क्रिकेट में भारत के लिए ओपनिंग करते रहे हैं, वही खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट में मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करते थे।" मांजरेकर के मुताबिक, "वे टेस्ट में ओपनिंग या टॉप तीन में खेलने के लिए खास एक्साईटमेंट नहीं रहते थे और चौथे, पांचवें या छठे नंबर पर बल्लेबाज़ी करके पूरी तरह संतुष्ट रहते थे।"
संजय मांजरेकर ने कहा, "वनडे क्रिकेट में खिलाड़ी टॉप तीन में बल्लेबाजी करने और ओपनिंग पाने के लिए लगभग बेताब रहते हैं। उनके मुताबिक, यही वजह है कि, उन्हें लगता है कि यह फॉर्मेट टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों के लिए आसान होता है, क्योंकि हर कोई ऊपर बल्लेबाजी करना चाहता है। उन्होंने समझाया कि 50 ओवर के क्रिकेट में ओपनिंग या नंबर तीन पर खेलने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि सामने चार स्लिप और गली जैसे आक्रामक फील्डर नहीं होते। साथ ही, गेंदबाज भी पूरी तरह विकेट लेने की सोच से नहीं आता, बल्कि उसकी कोशिश ज्यादातर ये रहती है कि बल्लेबाज एक ओवर में 10–15 रन न बना पाए।"
कौन सी पोजिशन के महान बल्लेबाज
संजय मांजरेकर ने कहा कि, "अगर कोई बल्लेबाज अच्छा खिलाड़ी है, तो वह वनडे क्रिकेट में शुरुआती 10–15 ओवर संभाल लेता है। इसके बाद फील्डिंग फैल जाती है और अगर बल्लेबाज स्ट्राइक को अच्छी तरह घुमा ले, तो धीरे-धीरे शतक तक पहुंचना आसान हो जाता है।" उन्होंने आगे कहा कि "वनडे क्रिकेट में असली चुनौती उन पोजिशनों पर बल्लेबाजी करना होता है, जहां युवराज सिंह, सुरेश रैना और एमएस धोनी जैसे खिलाड़ी खेलते थे, जो 4, 5, 6 नंबर पर होता है। ये मुश्किल पोजिशन थीं।”
संजय मांजरेकर ने कहा, "अगर किसी को सच में महान बल्लेबाज की तलाश है, तो वह उसे वनडे क्रिकेट में नहीं ढूंढेगा, खासकर नंबर एक, दो या तीन पर बल्लेबाजी करने वालों में। आज के दौर में महान बल्लेबाजों को परखने के लिए वनडे क्रिकेट आखिरी फॉर्मेट होना चाहिए, क्योंकि इस फॉर्मेट में टॉप तीन में खेलने वाले बल्लेबाजों को काफी ज्यादा सहूलियतें मिलती हैं, जिससे बल्लेबाजी करना तुलनात्मक रूप से आसान हो जाता है।"