Gautam Gambhir: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम का ऐलान हो गया है। 15 सदस्यीय टीम में शुभमन गिल को जगह नहीं मिली है। वहीं शुभमन गिल को बाहर किए जाने के बाद इस फैसले पर काफी चर्चा हुई है। शुभमन गिल को खराब फॉर्म की वजह से टीम से बाहर किया गया है। हाल ही में हुए साउथ अफ्रीका सीरीज में शुभमन गिल कोई खास कमाल नहीं कर पाए थे। वहीं 15 सदस्यीय टीम के ऐलान के बाद भारत के हेड कोच गौतम गंभीर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। वहां मौजूद पत्रकारों ने उनसे इस फैसले को लेकर सवाल किए, लेकिन गौतम गंभीर ने इस पर कोई बात नहीं की और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गए।
गिल पर गंभीर ने कुछ नहीं कहा
दिल्ली एयरपोर्ट पर स्पॉट हुए पूर्व ओपनिंग बल्लेबाज गौतम गंभीर ने किसी भी सवाल का जवाब देने से साफ इनकार कर दिया और सीधे अपनी कार में बैठकर बिना कुछ कहे निकल गए। उनकी यह खामोशी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने 26 साल के उप-कप्तान और टेस्ट व वनडे कप्तान शुभमन गिल को टी20 वर्ल्ड कप टीम से बाहर रखकर सबको चौंका दिया है। शुभमन गिल और जितेश शर्मा दोनों के टीम से बाहर होने के बाद सैमसन को अभिषेक शर्मा के साथ ओपनर के तौर पर तय किया गया। वहीं सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में अक्षर पटेल को नया T20I उपकप्तान बनाया गया।
शुभमन गिल ने एशिया कप के दौरान T20I क्रिकेट में वापसी की थी, जहां उन्हें संजू सैमसन की जगह टॉप ऑर्डर में मौका मिला। हालांकि इस दौरान उनका प्रदर्शन खास नहीं रहा। गिल ने 15 पारियों में करीब 137 के स्ट्राइक रेट से 291 रन तो बनाए, लेकिन एक भी अर्धशतक नहीं लगा सके। इस फॉर्मेट में उनका सबसे बड़ा स्कोर पाकिस्तान के खिलाफ 47 रन रहा, जो सेलेक्टर्स को प्रभावित करने के लिए काफी नहीं माना गया। पैर की उंगली में चोट लगने से शुभमन गिल की मुश्किलें और बढ़ गईं और इसी वजह से वह साउथ अफ्रीका के खिलाफ आखिरी T20I मैच नहीं खेल सके। इसके बाद संजू सैमसन को मौका मिला, जहां उन्होंने 22 गेंदों में तेज़ 37 रन बनाकर खुद को साबित किया।
कप्तान भी खराब फॉर्म से जूझ रहे
भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव का प्रदर्शन भी इस समय खास नहीं रहा है। इस साल T20I में सूर्यकुमार ने 19 पारियों में करीब 123 के स्ट्राइक रेट से सिर्फ 218 रन बनाए हैं, जो उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अब तक का सबसे कमजोर दौर माना जा रहा है। इसके बावजूद टीम मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा बनाए रखा। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस चयन में फॉर्म से ज्यादा लीडरशिप को तरजीह दी गई।