Get App

सैलरी से घर चलता है, SIP से भविष्य बनता है… लेकिन इमरजेंसी के वक्त कौन सा पैसा काम आता है? इस कहानी से समझिए

बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल की 1.8 लाख रुपये महीने की कमाई और 80 हजार रुपये की एसआईपी निवेश के बावजूद एक पारिवारिक मेडिकल इमरजेंसी ने उनकी आर्थिक तैयारी की पोल खोल दी। पिता के अचानक आईसीयू में भर्ती होने पर उन्हें समझ आया कि निवेश से ज्यादा जरूरी है, जरूरत के वक्त हाथ में तुरंत नकदी होना

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Aug 25, 2026 पर 11:20 AM
सैलरी से घर चलता है, SIP से भविष्य बनता है… लेकिन इमरजेंसी के वक्त कौन सा पैसा काम आता है? इस कहानी से समझिए
एक यूजर ने माता-पिता के लिए अलग मेडिकल इमरजेंसी फंड बनाने की बात कही।

बेंगलुरु में रहने वाले एक टेक प्रोफेशनल को अपनी 1.8 लाख रुपये की मासिक कमाई और हर महीने 80 हजार रुपये की एसआईपी निवेश की वजह से लगता था कि उनकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत है। अच्छी नौकरी, नियमित निवेश और शहर में आरामदायक जिंदगी ने उन्हें यह भरोसा दे दिया था कि किसी भी मुश्किल का सामना आसानी से किया जा सकता है। लेकिन परिवार में अचानक आई एक मेडिकल इमरजेंसी ने उनकी इस सोच को पूरी तरह बदल दिया। उनके पिता की तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल ने इलाज शुरू करने से पहले बड़ी रकम जमा करने को कहा।

उस वक्त उन्हें एहसास हुआ कि निवेश में पैसा होना और जरूरत के समय तुरंत हाथ में नकद होना दो अलग-अलग बातें हैं। बैंक खाते में सीमित रकम, पहले से इस्तेमाल हो चुका क्रेडिट कार्ड और निवेश से पैसे निकालने में लगने वाले समय ने उनकी परेशानी बढ़ा दी। इस घटना ने उन्हें अपनी असली वित्तीय स्थिति समझने पर मजबूर कर दिया।

पिता की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ने मांगे 2.5 लाख

टेक प्रोफेशनल के मुताबिक, उनके पिता अचानक बेहोश होकर गिर पड़े और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल ने इलाज शुरू करने के लिए करीब 2.5 लाख रुपये जमा करने को कहा। यहीं से उनकी परेशानी शुरू हुई। उनका मुख्य क्रेडिट कार्ड पहले ही एक लैपटॉप खरीदने के कारण लगभग पूरा इस्तेमाल हो चुका था। दूसरी तरफ, बैंक खाते में सिर्फ करीब 32 हजार रुपये बचे थे।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें