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Dhori Coal Mines Blast: देश का दूसरा सबसे बड़ा खदान हादसा, लावा और आग में जिंदा जले मजदूर, 268 की गई थी जान

दुर्घटना के समय दूसरी शिफ्ट के मजदूर बाहर निकल रहे थे, जबकि तीसरी शिफ्ट के मजदूर काम पर जा रहे थे। इसी बीच एक तेज धमाका हुआ और खदान के तीनों मुहानों से लावा और आग की लपटें निकलने लगीं। ढोरी कोलियरी ढोरी-खास कोयला खदान का हिस्सा थी, जो सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के स्वामित्व वाली एक कोयला खदान है

Shubham Sharmaअपडेटेड May 28, 2025 पर 6:41 PM
Dhori Coal Mines Blast: देश का दूसरा सबसे बड़ा खदान हादसा, लावा और आग में जिंदा जले मजदूर, 268 की गई थी जान
Dhori Coal Mines Blast: देश का दूसरा सबसे बड़ा खदान हादसा, लावा और आग में जिंदा जले मजदूर, 268 की गई थी जान

आज से करीब 60 साल पहले आज की दिन देश की दूसरी सबसे बड़ी खदान दुर्घटना हुई, जिसने पूरे भारत को हिला कर रख दिया। 27-28 मई की रात को ढोरी कोलियरी, बेरमो कोलफील्ड (तत्कालीन हजारीबाग) में जोरदार धमाका हुआ। रात करीब 12:45 बजे (पौने एक बजे) एक जबरदस्त विस्फोट हुआ, जिसमें 268 मजदूरों और कर्मचारियों की जान चली गई। ढोरी कोलियरी ढोरी-खास कोयला खदान का हिस्सा थी, जो सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के स्वामित्व वाली एक कोयला खदान है।

ढोरी कोलियरी अपनी "बेरमो सीम" और दूसरी कोयला सीम जैसे "अमलो, अपर करगली, लोअर करगली और कारो ग्रुप" के लिए जानी जाती है। कोयला सीम का मतलब धरती के क्रस्ट के भीतर कोयले की एक परत से है, जिसकी माइनिंग कर के अच्छा मुनाफा कमाया जाता है।

हादसे के समय स्थिति कैसी थी?

दुर्घटना के समय दूसरी शिफ्ट के मजदूर बाहर निकल रहे थे, जबकि तीसरी शिफ्ट के मजदूर काम पर जा रहे थे। इसी बीच एक तेज धमाका हुआ और खदान के तीनों मुहानों से लावा और आग की लपटें निकलने लगीं। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि दो से ढाई मील तक लावा फैल गया। पूरे इलाके की आसमान चिंगारियों से भर गया और धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि लोगों को लगा उनके कान के पर्दे फट जाएंगे।

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