Murshidabad Violence: हिंसा की लपटों में झुलस रहा है मुर्सिदाबाद, वक्फ कानून के खिलाफ भड़की आग, 3 की मौत, 150 गिरफ्तार

Murshidabad Violence: पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद वक्फ कानून के खिलाफ आग की लपटों में झुलस रहा है। स्थानीय लोग हिंसात्मक प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे 3 लोगों की मौत हो गई है। कई लोग घायल हो गए हैं। पुलिस ने 150 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिले में केंद्रीय बल तैनात कर दिया गया है। बीजेपी ने TMC पर कई आरोप लगाए हैं

अपडेटेड Apr 13, 2025 पर 10:40 AM
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Murshidabad Violence: मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के खिलाफ हिंसा जारी है।

पश्चिम बंगाल के कई जिलों में वक्फ कानून के खिलाफ हिंसात्मक प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ संशोधन कानून के विरोध में हिंसा भड़की हुई है। हिंसा में तीन लोगों लोगों की मौत हो गई है। कई लोग घायल हो गए हैं। पुलिस ने 150 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। पश्चिम बंगाल में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। जिले में सीमा सुरक्षा बल की करीब 8 कंपनियों के साथ ही करीब 1,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। हिंसक झड़प वाले इलाकों में डीजी से लेकर एडिशनल एसपी तक के अधिकारियों को तैनात किया गया है।

वक्फ कानून के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने बीएसएफ पर भी हमला किया है। कल यानी शनिवार को पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार ने कहा था कि मुर्शिदाबाद जिले के सुती, समशेरगंज, जलांगी, लालगोला और धुलियान में हिंसा प्रभावित इलाकों में स्थिति नियंत्रण में है।

हिंसा की आग में यूसुफ पठान का नाम


इस हिंसा में अब क्रिकेट की पिच से सियासत में उतरे यूसुन पठान का नाम भी घसीटा जाने लगा है। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से टीएमसी सांसद पठान पर मुर्शिदाबाद हिंसा के बीच मौज-मस्ती का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया में एक फोटो वायरल हो रही है। जिसमें पठान ने चाय पीते हुए एक पोस्ट डाला और लिखा- खुशनुमा दोपहर, अच्छी चाय और शांत माहौल… अच्छे पल का आनंद लेते हुए। यूसुफ पठान की इस तस्वीर को देखकर बीजेपी नेताओं सहित कई लोग भड़क गए। उन्होंने टीएमसी सांसद की तुलना प्रचीन रोम के राजा नीरो से की है। जिसे लेकर एक कहावत मशहूर है कि जब रोम जल रहा था, तब नीरो बंसी बजा रहा था।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट

न्यायमूर्ति सौमेन सेन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि जब ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं तो न्यायालय अपनी आंखें मूंदे नहीं रह सकता है। आम लोगों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने पर जोर दिया। अदालत ने केंद्र और राज्य को 17 अप्रैल को अगली सुनवाई से पहले स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

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