NASA Artemis II Launch March 2026: नासा ने 54 साल के बाद फिर से चांद की यात्रा करने के लिए कमर कस ली है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कन्फर्म किया है कि उसके आर्टेमिस II के लिए टारगेट लॉन्च डे 6 मार्च है। इस मिशन के माध्यम से 1972 के बाद पहली बार नासा के 4 एस्ट्रोनॉट चांद पर रवाना होंगे। हालांकि, ये अंतरिक्ष यात्री बस चांद तक की यात्रा कर के धरती पर वापस लौट आएंगे। नासा का आर्टेमिस II मिशन चंद्रमा पर लैंड नहीं करेगा। अपने इस मिशन के लिए नासा ने सभी चारों अंतरिक्ष यात्रियों को क्वारेंटाइन में भेज दिया है।
चांद की यात्रा करने वाला आर्टेमिस II मिशन चार एस्ट्रोनॉट्स को 10 दिन के सफर पर ले जाएगा। यह मिशन चांद पर नहीं उतरेगा और न ही लूनर ऑर्बिट में जाएगा। यह चांद के करीब से फ्लाईबाय करेगा और फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी के जरिए धरती पर वापस आएगा। नासा के अनुसार यह क्रू चांद से भी करीब 9,200 किलोमीटर आगे तक जाएगा, जो अब तक इंसानों द्वारा तय की गई सबसे ज्यादा दूरी होगी।
Artemis III के लिए रास्ता तैयार करेगा
करीब 10 दिन की इस उड़ान में रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट के सभी सिस्टम्स की गहन जांच होगी। यह मिशन भविष्य के Artemis III के लिए रास्ता तैयार करेगा, जिसमें चांद के साउथ पोल पर इंसानों को उतारने की योजना है। इसके साथ ही अंतरिक्ष का इंसानी शरीर पर क्या असर पड़ता है, इसे समझने के लिए क्रू के ब्लड सैंपल्स पर वैज्ञानिक अध्ययन भी किया जाएगा। नासा का लक्ष्य चांद पर स्थायी मौजूदगी बनाना और आगे चलकर मंगल मिशन की नींव रखना है।
क्वारंटीन हुई आर्टेमिस II की क्रू
नासा के क्रू में एस्ट्रोनॉट्स रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच के साथ कैनेडियन स्पेस एजेंसी के एस्ट्रोनॉट्स जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। लॉन्च से पहले, मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों को ह्यूस्टन में क्वारंटीन कर दिया गया है, ताकि लिफ्टऑफ से पहले बीमारी का खतरा कम से कम हो। नासा की परंपरा के अनुसार लॉन्च से करीब 14 दिन पहले सभी एस्ट्रोनॉट्स को क्वारंटीन में रखा जाता है। यह मिशन 1972 में आखिरी अपोलो फ्लाइट के बाद पहला क्रू वाला लूनर एक्सपीडिशन है।
लूनर बेस की ओर एक अहम कदम
नासा आर्टेमिस II के लौटने को एक सांकेतिक वापसी के तौर पर देख रहा है। नासा इसे चांद पर इंसानों को फिर से उतारने और लंबे समय तक मौजूदगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण एक कदम के तौर पर देखता है। एजेंसी को उम्मीद है कि भविष्य का वह बेस मंगल ग्रह के मिशन के लिए लॉन्च पॉइंट का काम कर सकता है, जिससे सोलर सिस्टम में इंसानी खोज को और गहराई तक बढ़ाया जा सकेगा।
एक ऐतिहासिक लॉन्च का काउंटडाउन
आर्टेमिस II स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट अब लॉन्चपैड पर ही रहेंगे, क्योंकि इंजीनियर आखिरी तैयारी पूरी कर रहे हैं। अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक हुआ, तो 6 मार्च को 50 से ज्यादा सालों में इंसानियत का चांद के चारों ओर पहला क्रू वाला सफर होगा, यह एक ऐसा मिशन है जो अपोलो की विरासत को नई पीढ़ी के एक्सप्लोरर्स के सपनों से जोड़ता है।