शाम की हल्की रोशनी में पुणे की एक पॉश सोसायटी में सब कुछ सामान्य लग रहा था। हर कोई अपनी-अपनी दिनचर्या में व्यस्त था। लेकिन ठीक उसी समय, मासूमियत का चोला ओढ़े एक दरिंदा चुपचाप उस सोसायटी की ओर बढ़ रहा था — हाथ में एक फर्जी कूरियर और चेहरे पर शांत लेकिन शातिर मुस्कान। किसी को क्या पता था कि उस एक दस्तक के साथ एक महिला की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी। उसने दरवाजा खोला, सोचा बस एक सिग्नेचर करना है… लेकिन अगले ही पल सब कुछ अंधेरे में डूब गया। यह कोई आम वारदात नहीं थी। यह एक ऐसा खौफनाक मंजर था, जिससे न सिर्फ पीड़िता की रूह तक कांप गई, बल्कि पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में ला खड़ा किया। और फिर, जैसे किसी थ्रिलर फिल्म की कहानी में होता है — मोबाइल में छोड़ा गया एक डरावना मैसेज: "मैं वापस आऊंगा"।
