Rafael deal : अब समंदर में गरजेगा राफाल-M, जानिए अपने पुराने वर्जन से कितना अगल है ये फोल्डेबल विंग्स वाला जांबाज

राफाल मरीन राफाल से भी ज्यादा खतरनाक साबित होने जा रहा है। राफाल M को खतरनाक बनाने की सबसे बड़ी वजह है इसकी हथियार की क्षमता। राफाल M कई सारे हथियारों के साथ एंटी शिप मिसाइल से लैस है जबकि राफाल स्टैंडर्ड रेंज वाले हथियारों से वार करे में सक्षम है

अपडेटेड Apr 28, 2025 पर 7:43 PM
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फाइटर जेट के हथियार लोड करने के बाद उसके लैंडिंग और टेक ऑफ में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। लेकिन राफाल M की खास बात ये है कि ये बहुत कम जगह पर भी ‘लैंड’ कर सकता है

Rafale Marine News : पहलगाम में नापाक हरकत के बाद भारत के ऐक्शन से पाकिस्तान दहशत में है। एयरस्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब हिंदुस्तान के दुश्मन भारत के नए बाज से कांप रहे हैं। भारत अपने भरोसेमंद साथी फ्रांस से राफाल-M लेने जा रहा है। भारत को जल्द फ्रांस से 26 राफाल-M मिलने जा रहे हैं। भारत के दुश्मनों में सबसे ज्यादा दहशत इस बात से है कि भारत राफेल मरीन विमानों की तैनाती अपने ताकतवर युद्धपोत में एक INS विक्रांत पर करने जा रहा है। लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन ने इन फाइटर जेट में भारत की जरूरत के हिसाब से कई बदलाव किए हैं। इसमें एंटी शिप स्ट्राइक, न्यूक्लियर हथियार लॉन्च करने की क्षमता और 10 घंटे तक फ्लाइट रिकॉर्ड करने जैसे फीचर शामिल हैं।

राफाल M की डील में सबसे बड़ी बात ये है कि फ्रांस से जो डील है उसमें भारत को वेपन सिस्टम, स्पेयर पार्ट्स और एयरक्राफ्ट के जरूरी टूल्स भी मिलने जा रहे हैं। 50.1 फीट लंबे और 15 हजार किलो वजनी दुश्मन के इस काल यानि राफेल-एम में शक्तिशाली एंटी शिप मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। ये मिसाइलें हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने में सक्षम हैं। ये फाइटर जेट पनडुब्बियां खोजकर ध्वस्त करने वाले विशेष रडार से लैस है। खास बात ये है कि राफेल-एम में बीच हवा में ही रीफ्यूलिंग की जा सकती है। फ्यूल कैपिसिटी की बात करें तो इसमें 11,202 किलोग्राम फ्यूल भरा जा सकता है। जिससे ये ज्यादा देर तक हवा में रह सकता है। ये सिंगल और डबल सीटर विमान 52 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसकी 2205 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार ने दुश्मन की रातों की नींद उड़ा दी है।

यानि राफाल मरीन राफाल से भी ज्यादा खतरनाक साबित होने जा रहा है। राफाल M को खतरनाक बनाने की सबसे बड़ी वजह है इसकी हथियार की क्षमता। राफाल M कई सारे हथियारों के साथ एंटी शिप मिसाइल से लैस है जबकि राफाल स्टैंडर्ड रेंज वाले हथियारों से वार करे में सक्षम है। राफाल का रडार स्टैंडर्ड है। जबकि राफाल M के राडार सिस्टम को नौसेना के हिसाब से बदलाव किया गया है। अभी तक भारत के पास जो राफाल हैं उसके विंग नॉन फोल्डेबल हैं। जबकि राफाल एम के विंग्स फोल्डेबल हैं। राफाल का स्टैंडर्ड एयरफ्रेम हैं जबकि राफाल M को एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर लैंडिंग के हिसाब से मॉडिफाइ किया गया है। राफाल M में टेलहुक मौजूद हैं। जबकि अभी भारत के पास जो राफाल है उसमें टेलहुक नहीं है। राफेल-एम सिर्फ एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। ये पाकिस्तान के एफ-16 और चीन के जे-20 से ज्यादा बेहतर है। ये उड़ान भरने के बाद 3700 किमी दूर तक हमला करने में सक्षम है। इसमें 30 एमएम की ऑटो कैनन गन और 14 हाई प्वाइंट्स हैं।


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फाइटर जेट के हथियार लोड करने के बाद उसके लैंडिंग और टेक ऑफ में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। लेकिन राफाल M की खास बात ये है कि ये बहुत कम जगह पर भी ‘लैंड’ कर सकता है। नौसेना के पास दो विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य और विक्रांत हैं। इन पर अभी पुराने मिग 29 के फाइटर जेट तैनात हैं। ऐसे में मॉडर्न राफेल-एम की तैनाती हो जाएगी तो समंदर में भारत की ताकत और बढ़ जाएगी। राफेल-एम फाइटर जेट से जल थल और वायु में सेना की पकड़ और मज़बूत होगी। यही वजह है कि राफाल एम की धमक ने दुश्मनों को खौफजदा कर रखा है।

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