फेक IDs पर रेलवे का एक्शन, मंत्रालय और IRCTC ने 2.5 करोड़ IDs किए ब्लॉक, अब आसानी से होगी टिकट बुकिंग

रेल मंत्रालय और IRCTC ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग में धोखाधड़ी रोकने के लिए 2.5 करोड़ फर्जी IDs ब्लॉक कर दी हैं। ये फर्जी अकाउंट्स टिकट विंडो खुलते ही सीटें भरने और पेमेंट गेटवे क्रैश कराने में इस्तेमाल हो रहे थे। अब ऑनलाइन टिकटिंग सिस्टम को और सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं

अपडेटेड Jun 04, 2025 पर 7:18 PM
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ऑनलाइन टिकट प्रणाली को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जा रहा है ताकि फ्रॉड रोका जा सके

ट्रेन टिकट की ऑनलाइन विंडो खुलते ही सीटों का चंद सेकेंडो में फुल हो जाना या तत्काल बुकिंग के दौरान पेमेंट गेटवे का क्रैश हो जाना, रेल यात्रियों को आए दिन इस तरह की असुविधा का सामना करना पड़ता है। आपको होने वाली इस दिक्कत की वजह है जालसाजों के गैंग,जो बॉट अकाउंट के जरिए बुकिंग खुलते ही टिकट साफ कर देते हैं। इन्ही जालसाजों पर एक्शन लेते हुए रेल मंत्रालय और IRCTC ने 2.5 करोड़ फेक Ids को ब्लॉक किया है। इन्ही फर्जी आईडी की मदद से जालसाज ऑनलाइन टिकट विंडो के खुलते ही 5 मिनट में सीटें बुक कर लेते हैं। इनमें से कई अकाउंट एजेंटों या सॉफ्टवेयर से जुड़े थे जो सिस्टम में खामियों का फायदा उठा रहे थे। अब केवल सत्यापित और असली यूज़र्स को ही टिकट बुकिंग की सुविधा मिल रही है।

इस एक्शन के बाद रेल मंत्रालय ने सफाई दी है कि ऑनलाइन टिकट प्रणाली को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जा रहा है ताकि फ्रॉड रोका जा सके। जिन यूज़र्स का आधार वेरिफिकेशन नहीं हुआ है वे रजिस्ट्रेशन के तीन दिन बाद ही तत्काल, प्रीमियम तत्काल या ओपनिंग एडवांस टिकट (ARP) बुक कर सकेंगे। लेकिन जिन यूज़र्स का आधार वेरिफिकेशन हो चुका है वे बिना किसी देरी के तुरंत बुकिंग कर सकते हैं।

ताजे आंक़ड़ों के मुताबिक रोज़ाना लॉगिन करने वालों की संख्या वित्त वर्ष 2023-24 के 69.08 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 82.57 लाख हो गई (लगभग 19.53 फीसदी की बढ़त) है। वहीं, रोज़ाना होने वाली टिकट बुकिंग में 11.85 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अब कुल आरक्षित टिकटों का 86.38 फीसदी ऑनलाइन बुक हो रहा है।


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वेबसाइट का 87 फीसदी स्टैटिक कंटेंट अब CDN (Content Delivery Network) के ज़रिये सर्वे हो रहा है जिससे वेबसाइट तेजी से खुलती है और सर्वर पर लोड कम होता है। AI-आधारित सिस्टम बॉट ट्रैफिक को एक्टिव रूप से पहचानता है और तुरंत ब्लॉक करता है। संदिग्ध यूज़र्स की पहचान कर उन्हें डिएक्टिवेट किया जा रहा है और साइबर क्राइम पोर्टल के ज़रिए शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

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