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Rare Blue Moon: खास होगी 31 मई की रात, जब दुर्लभ ब्लू मून के साथ माइक्रो मून से रोशन होगी पूर्णिमा की रात

Rare Blue Moon: इस साल मई का महीने धार्मिक दृष्टि से और खगोलीय दृष्टि से भी बेहद खास है। इस महीने में दुर्लभ ब्लू मून होगा, जिसे खगोल शास्त्र में दुर्लभ माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा होगी, जो तीन साल में एक बार आती है। आइए जानें

MoneyControl Newsअपडेटेड May 21, 2026 पर 3:01 PM
Rare Blue Moon: खास होगी 31 मई की रात, जब दुर्लभ ब्लू मून के साथ माइक्रो मून से रोशन होगी पूर्णिमा की रात
माइक्रोमून इस महीने की आखिरी तारीख यानी 31 मई 2026 हो आसमान में उगेगा।

Rare Blue Moon: चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है जो उसके चारों ओर चक्कर लगाता है। चंद्रमा का यह चक्कर परफेक्ट गोल घेरे में न होकर, अंडाकार होता है। अपनी इस यात्रा के दौरान जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है, तो उसका आकार सामान्य से बड़ा होता है और इस स्थिति को सुपरमून कहा जाता है। वहीं, ये खगोलीय पिंड जब पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी पर होता है, तो उसका आकार सामान्य से छोटा नजर आता है और तब इसे माइक्रोमून कहा जाता है। ऐसा ही एक माइक्रोमून इस महीने की आखिरी तारीख यानी 31 मई 2026 हो आसमान में उगेगा।

लेकिन यह तारीख बस इस दुर्लभ खगोलीय घटना की गवाह नहीं होगी। इसके अलावा 31 मई 2026 को एक और बेहद खास बात होगी। उस रात आसमान में जो चांद होगा, वो ब्लू मून होगा। यह एक मान्यता है, जिसका चांद के रंग से कोई लेना-देना नहीं है। नेटिव अमेरिकी लोगों के प्राचीन खगोलीय लेखों में किसी सीजन में चार से अधिक पूर्णिमा या एक माह में दो पूर्णिमा होने पर दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून बताया गया है।

ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा तारीख

द्रिक पंचांग के मुताबिक, भारत में पूर्णिमा तिथि 30 मई की सुबह 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होगी और समापन 31 मई दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा। पूर्णिमा उदिया तिथि में यानी 31 मई को मनाई जाएगी और इस दिन पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा।

रेयर ब्लू मून क्या है?

‘ब्लू मून’ में चांद के रंग से कोई लेना-देना नहीं है। यह कैलेंडर पर आधारित एक खगोलीय घटना है। ऐसा तब होता है जब एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा पड़ती है। एक मई को पहली पूर्णिमा थी और 31 मई को दूसरी पूर्णिमा है। इस दौरान चांद का रंग नहीं बदलेगा। “ब्लू मून” शब्द पूरी तरह से खगोलीय भाषा का हिस्सा है। पूराने समय में लोग चंद्रमा की रोशनी के आधार पर कृषि का कार्य निर्धारित करते थे। इसमें पूर्णिमा का अहम रोल होता था, क्योंकि इस दिन चांद की रोशनी सबसे ज्यादा होती है।

ब्लू मून कब और कहां देखा जा सकता है?

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