अंटार्कटिका में स्थित वोस्तोक स्टेशन पृथ्वी की सबसे ठंडी और दुर्गम जगहों में से एक माना जाता है। यहां का मौसम बेहद कठोर और चुनौतीपूर्ण है, जिससे सामान्य जीवन जीना लगभग असंभव प्रतीत होता है। चारों ओर फैली मोटी बर्फ की परत और तेज ठंडी हवाओं के कारण बाहर की गतिविधियां बेहद कठिन हो जाती हैं। साल के कई महीने सूरज नहीं उगता, जिससे अंधेरा और ठंड और भी बढ़ जाती है। ये स्टेशन न सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए शोध का केंद्र है, बल्कि पृथ्वी के चरम मौसमों और जीवन की संभावनाओं को समझने का एक अद्भुत स्थान भी है।
यहां के बर्फीले वातावरण, भारी तापमान गिरावट और जमी हुई झीलों की उपस्थिति इसे एक रहस्यमय और चुनौतीपूर्ण स्थल बनाती है। वोस्तोक स्टेशन में रहना और काम करना किसी रोमांचक साहसिक यात्रा से कम नहीं है।
वोस्तोक स्टेशन पर साल में छह महीने तक सूरज नहीं उगता। इस समय दिन और रात का कोई फर्क नहीं रहता और पूरी जगह अंधेरे में डूबी रहती है। सूरज न उगने के कारण तापमान में भारी गिरावट आती है और ठंड और भी बढ़ जाती है। इस दौरान बाहर निकलना और काम करना काफी मुश्किल हो जाता है।
21 जुलाई 1983 को यहां रिकॉर्ड किया गया तापमान -89.2 डिग्री सेल्सियस था। ये न केवल अंटार्कटिका का, बल्कि पृथ्वी का अब तक मापा गया सबसे कम तापमान है। इतनी ठंड में सामान्य इंसान के लिए बाहर रहना खतरनाक हो सकता है और विशेष सुरक्षा उपायों की जरूरत होती है।
वोस्तोक स्टेशन की हवा इतनी ठंडी है कि सांस लेना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इंसानी शरीर पर इस ठंडी हवा का गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए यहां रहने वाले लोगों को खास तरह के कपड़े और सुरक्षा उपाय अपनाने पड़ते हैं।
झील वोस्तोक: बर्फ के नीचे का रहस्य
स्टेशन के नीचे लगभग 4 किलोमीटर मोटी बर्फ की परत है। इस बर्फ के नीचे झील वोस्तोक स्थित है, जिसे वैज्ञानिक जादुई और रहस्यमय मानते हैं। बर्फ की मोटी परत के कारण झील तक पहुंचना बेहद मुश्किल है, लेकिन इसके भीतर की जिंदगी और संरचना शोधकर्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बर्फ के नीचे लाखों साल पुराने फॉसिल्स और सूक्ष्म जीव (Microbes) पाए गए हैं। इन प्राचीन जीवों का अध्ययन वैज्ञानिकों को पृथ्वी के प्राचीन जीवन और उसके विकास के बारे में जानकारी देता है। ये शोध पृथ्वी और अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं को समझने में भी मदद करता है।