भारत में डाक सेवा केवल एक सरकारी व्यवस्था नहीं, बल्कि भावनाओं को जोड़ने वाली एक मजबूत कड़ी रही है। पुराने जमाने में जब न तो मोबाइल था, न इंटरनेट, तब चिट्ठियां ही अपनों से जुड़े रहने का सबसे विश्वसनीय माध्यम हुआ करती थीं। और इन चिट्ठियों का सबसे अहम साथी होता था लेटर बॉक्स। आज भी भारत के कई कोनों में आपको सड़क किनारे खड़ा, एक शांत और स्थिर लाल रंग का लेटर बॉक्स नजर आ जाएगा। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि इन लेटर बॉक्स का रंग हमेशा लाल ही क्यों होता है? क्या ये बस परंपरा है या इसके पीछे कोई खास वजह छिपी है?
