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पाकिस्तान पर भारी भारत का जबरदस्त 'डोज', अफगान बजारों से आउट हुईं PAK की दवाइयां

पाकिस्तान से दवाओं की सप्लाई रुकने के बाद अफगानिस्तान में भारतीय दवाओं की मांग तेज़ी से बढ़ी है। इसका फायदा भारत के फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट को मिला है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अफगानिस्तान को करीब 108 मिलियन डॉलर की दवाएं भेजीं। अनुमान है कि 2025 के बाकी महीनों में भी लगभग 100 मिलियन डॉलर की दवाएं और एक्सपोर्ट की जाएंगी

Rajat Kumarअपडेटेड Jan 16, 2026 पर 2:44 PM
पाकिस्तान पर भारी भारत का जबरदस्त 'डोज', अफगान बजारों से आउट हुईं  PAK की दवाइयां
अफगानिस्तान में एक मोहल्ले की फार्मेसी से की गई एक छोटी-सी दवा खरीदारी आज एक बड़े क्षेत्रीय बदलाव की तस्वीर दिखा रही है।

अफगानिस्तान में एक मोहल्ले की फार्मेसी से की गई एक छोटी-सी दवा खरीदारी आज एक बड़े क्षेत्रीय बदलाव की तस्वीर दिखा रही है। राजनीतिक तनाव और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण पाकिस्तान का फार्मा एक्सपोर्ट लगातार घट रहा है। इसी बीच भारतीय दवाएं बिना ज़्यादा शोर किए इस कमी को पूरा कर रही हैं।यह कहानी पहले एक अफगान ब्लॉगर की सोशल मीडिया पोस्ट के रूप में सामने आई थी, लेकिन अब यह साफ संकेत दे रही है कि अफगानिस्तान की हेल्थकेयर सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव हो चुका है। पाकिस्तान धीरे-धीरे इस सिस्टम से बाहर होता जा रहा है, जबकि भारत एक भरोसेमंद विकल्प के तौर पर उभर रहा है।

यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब अफगानिस्तान बुनियादी दवाओं के लिए काफी हद तक इंपोर्ट पर निर्भर है। कभी इस बाजार पर पाकिस्तान का मजबूत नियंत्रण था, लेकिन सीमा बंद होने, बार-बार होने वाले टकराव और तालिबान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया। इसके उलट भारत ने सस्ती और भरोसेमंद दवाओं के साथ-साथ आपातकालीन मदद भी दी है। इसी वजह से भारत धीरे-धीरे अफगान बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करता जा रहा है।

वायरल हो रहा ये वीडियो 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अफगानिस्तान के ब्लॉगर फजल अफगान ने हाल ही में एक स्थानीय फार्मेसी से जुड़ा अपना अनुभव शेयर किया, जो देखते ही देखते चर्चा में आ गया। उन्होंने बताया कि सिरदर्द के लिए वे दवा खरीदने गए थे और उन्होंने पहले पैरोल मांगी, जो पाकिस्तान और तुर्की में बिकने वाली पैरासिटामोल की एक जानी-पहचानी ब्रांड है। उन्हें इस दवा की क्वालिटी पर भरोसा था।

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