Israel-US Iran War: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि कनाडा ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध में शामिल होने से साफ तौर पर मना नहीं कर सकता है। हालांकि, कार्नी ने कहा है कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि ईरान के खिलाफ कनाडा युद्ध में सेना भेजेगा या नहीं। उन्होंने कहा कि कनाडा अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा। लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य मदद देने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने पहले कहा था कि US-इज़रायली हमले इंटरनेशनल कानून के खिलाफ लगते हैं। अमेरिकी हमलों का समर्थन करने वाले मार्क कार्नी ने एक दिन पहले कहा था, "ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के साथ मेल नहीं खाते।"
ओटावा के नजरिए को समझाते हुए कार्नी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में हो रहे डेवलपमेंट पर कनाडा का नजरिया साफ है। उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान को पूरे इलाके में अस्थिरता और आतंक का मुख्य सोर्स बताया। कार्नी ने ईरान के ह्यूमन राइट्स रिकॉर्ड की आलोचना की।
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से जारी भीषण युद्ध अब छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने गुरुवार तड़के इजरायल की ओर कई मिसाइलें दागीं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। यह हमला उस घटना के एक दिन बाद हुआ जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने कथित तौर पर एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया था। इसके बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल और उसके सहयोगियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी।
ईरान ने यह भी धमकी दी है कि वह पूरे पश्चिम एशिया में सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। उधर इजरायली सेना ने भी जवाबी कार्रवाई जारी रखते हुए लेबनान में ईरान समर्थित चरमपंथी संगठन Hezbollah के ठिकानों पर नए हमले शुरू करने की जानकारी दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने शनिवार से शुरू हुए इस अभियान में ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व, मिसाइल भंडार और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और वहां की सरकार पर दबाव बनाना हो सकता है।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि युद्ध के मोर्चे पर अमेरिकी बलों ने शानदार काम किया है। वहीं, अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों ने भी ट्रंप का समर्थन करते हुए युद्ध रोकने से जुड़े प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
अधिकारियों के मुताबिक अब तक इस युद्ध में ईरान में 1,000 से अधिक, लेबनान में 70 से ज्यादा और इजरायल में करीब 12 लोगों की मौत हो चुकी है। इस संघर्ष में 6 अमेरिकियों की मौत हुई है। इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। जबकि पश्चिम एशिया में लाखों यात्री फंसे हुए हैं।