Donald Trump: वेनेजुएला के तेल पर कब्जे के बाद अब ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं। ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना बहुत आसानी से ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल हब, खर्ग द्वीप पर कब्जा कर सकती है। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 31 दिनों से युद्ध जारी है और फिलहाल शांति के कोई आसार नजर नहीं आ रहे है।
क्या है ट्रंप का 'ऑयल' प्लान?
'फाइनेंशियल टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने अपनी रणनीति को लेकर खुलकर बात की। ट्रंप ने कहा, 'सच कहूं तो मेरा सबसे पसंदीदा काम ईरान के तेल पर कब्जा करना है।' उन्होंने दावा किया कि इस द्वीप पर ईरान की सुरक्षा व्यवस्था बहुत कमजोर है। ट्रंप के शब्दों में, 'मुझे नहीं लगता कि उनके पास कोई बचाव है। हम इसे बहुत आसानी से ले सकते हैं।'
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अगर अमेरिका खर्ग द्वीप पर कब्जा करता है, तो वहां अमेरिकी सैनिकों को लंबे समय तक तैनात रहना पड़ सकता है। ट्रंप ने इसकी तुलना वेनेजुएला में अमेरिकी रुख से की, जहां वाशिंगटन ने वहां के तेल उद्योग को 'अनिश्चित काल' के लिए नियंत्रित करने का लक्ष्य रखा था।
ईरान के लिए क्यों जरूरी है खर्ग द्वीप?
ईरान के तट से लगभग 24 किलोमीटर दूर स्थित यह छोटा सा द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ईरान के कच्चे तेल के कुल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से होकर गुजरता है। ईरान के पास दुनिया का तीसरा या चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार यही है जो करीब 209 अरब बैरल है। खर्ग द्वीप वह मुख्य केंद्र है जहां से यह तेल बड़े टैंकरों में भरकर पूरी दुनिया में भेजा जाता है। यह द्वीप ईरानी सेना (IRGC) के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। इस पर कब्जे का मतलब होगा ईरान की सैन्य शक्ति को आर्थिक रूप से पंगु बनाना। अगर अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा कर लेता है या इसकी घेराबंदी कर देता है, तो ईरान की कमाई का मुख्य जरिया पूरी तरह बंद हो जाएगा।
जमीनी हमले की तैयारी में है अमेरिका
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहना चाहता। अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य के पास टारगेटेड छापेमारी और खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की योजना बना रहा है। यह कोई फुल फ्लेज लेवल का आक्रमण नहीं होगा, बल्कि इसमें स्पेशल फोर्सेज और इन्फेंट्री सैनिकों का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर ईरान की पकड़ को कमजोर किया जा सके।
वाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना किसी भी समय इस द्वीप पर हमला करने या नियंत्रण करने की क्षमता रखती है। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन इस द्वीप का इस्तेमाल ईरान पर 'प्रेशर पॉइंट' के रूप में करना चाहता है, ताकि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए मजबूर किया जा सके।