भारत में 2 मार्च से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बावजूद ईंधन की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन पाकिस्तान पर इसका असर लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान में ईंधन संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा। ARY News की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समुद्री रास्ते पर रुकावट के कारण फ्यूल की कीमतें करीब 200% तक बढ़ गई हैं।
रविवार को पाकिस्तान ने हाई-ऑक्टेन फ्यूल (जो ज्यादातर लग्जरी गाड़ियों में इस्तेमाल होता है) की कीमत में बड़ा इजाफा किया। इसकी कीमत 100 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 300 रुपए प्रति लीटर कर दी गई।
पाकिस्तान सरकार ने इस बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक हाई लेवल बैठक में यह फैसला लिया गया, जहां फ्यूल की कीमतों और आर्थिक राहत पर चर्चा हुई।
शहबाज शरीफ ने कहा कि इस फैसले से सरकार हर महीने करीब 9 अरब रुपए बचाएगी और इस बचत का इस्तेमाल आम जनता को राहत देने में किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ कम होगा, क्योंकि इसका असर अमीर वर्ग पर पड़ेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, हाई-ऑक्टेन फ्यूल की कीमत बढ़ने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट या हवाई यात्रा के किराए पर असर नहीं पड़ेगा।
इससे पहले भी 2 मार्च को होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी। पेट्रोल करीब 20% महंगा होकर 266 रुपए से 321 रुपए प्रति लीटर हो गया, जबकि डीजल 336 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया।
वहीं, इस दौरान सिर्फ एक पाकिस्तानी तेल टैंकर “MT Karachi” ही इस रास्ते से गुजर पाया, जबकि भारत के चार टैंकर सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं, जिससे भारत की सप्लाई पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ा है।
श्रीलंका में दो बार बढ़ी तेल की कीमतें
इससे पहले श्रीलंका ने भी रविवार को एक बार फिर ईंधन की कीमतें बढ़ा दीं, और यह दो हफ्तों में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के असर से निपटने के लिए सरकार यह कदम उठा रही है।
नई दरों के अनुसार, पेट्रोल की कीमत 317 रुपए से बढ़ाकर 398 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं डीजल, जो आमतौर पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होता है, 79 रुपए महंगा होकर 382 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
पिछले हफ्ते भी सरकार ने ईंधन की कीमतों में करीब 8% की बढ़ोतरी की थी और खपत कम करने के लिए राशनिंग (सीमित सप्लाई) लागू की थी।
सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के एक अधिकारी के मुताबिक, इस नई बढ़ोतरी का मकसद ईंधन की खपत में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी लाना है, ताकि संकट के असर को नियंत्रित किया जा सके।