Iran-US War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका मकसद ईरान के तेल पर कब्जा करना है। युद्ध के बीच तेल अब कूटनीति का केंद्र बन गया है। अमेरिका की नजर विशेष रूप से खर्ग द्वीप पर है, जो ईरान की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है। आपको बता दें कि ईरान के तेल पर कब्जे वाले बयान से पहले ही ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बनाकर वहां के तेल पर नियंत्रण का दावा कर चुके हैं।
ऐसे में आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि आखिर ईरान के पास कितना तेल है? वैश्विक तेल निर्यात में उसकी कितनी हिस्सेदारी है और खर्ग द्वीप पर क्यों है अमेरिका का निशाना? आइए हम आपको बताते हैं।
आखिर ईरान के पास कितना तेल है?
ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडार वाले देशों में से एक है। ईरान के पास लगभग 208.6 अरब बैरल वेरिफाइड तेल भंडार है। यह दुनिया के कुल भंडार का लगभग 12% है। तेल भंडार के मामले में ईरान दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। अगर ईरान केवल अपने उपयोग के लिए तेल रखे, तो वर्तमान खपत के आधार पर यह भंडार 290 वर्षों तक चल सकता है। फिलहाल ईरान प्रतिदिन 30 से 45 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है।
प्रतिबंधों के बावजूद कितना तेल निर्यात करता है ईरान?
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भी ईरान ने अपने तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने के रास्ते निकाले हुए है। 2025-2026 में ईरान प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात कर रहा है। ईरान के कुल तेल निर्यात का 80-90% हिस्सा अकेले चीन खरीदता है। ईरान ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से बचने के लिए अपना पूरा ध्यान पूर्व की ओर लगा दिया है।
खर्ग द्वीप क्यों है ट्रंप का मुख्य निशाना?
खर्ग द्वीप केवल एक टर्मिनल नहीं है, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था की सांसें यहीं से चलती हैं। ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का 90 से 94 प्रतिशत हिस्सा इसी अकेले द्वीप से होकर गुजरता है। इस द्वीप में प्रतिदिन 70 लाख बैरल तेल लोड करने की विशाल क्षमता है। अगर अमेरिका इस द्वीप को अपने नियंत्रण में ले लेता है या इसकी घेराबंदी कर देता है, तो ईरान का ग्लोबल मार्केट से संपर्क पूरी तरह कट जाएगा और उसकी कमाई का जरिया खत्म हो जाएगा।
क्या है ट्रंप का 'खर्ग प्लान'?
ट्रंप का खर्ग द्वीप को लेकर इरादा केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक विकल्प है। ट्रंप ने खुले तौर पर कहा है कि 'हो सकता है हम खर्ग द्वीप ले लें, हो सकता है न लें।' यह दर्शाता है कि यह ऑप्शन उनकी मेज पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंटागन ने खर्ग द्वीप जैसे रणनीतिक स्थलों पर 'सीमित जमीनी हमले' के लिए योजना तैयार कर ली है। ट्रंप का मानना है कि तेल पर नियंत्रण करके वह ईरान को घुटनों पर ला सकते हैं और युद्ध की दिशा बदल सकते हैं।
युद्ध के कारण दुनिया भर में ईंधन की कमी हो गई है और कीमतें आसमान छू रही हैं। इसे देखते हुए अमेरिका ने कई अस्थायी कदम उठाए है। ट्रंप ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देते हुए समुद्र में फंसे 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल को 19 अप्रैल तक बेचने की अनुमति दी है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों को कम करना है।