US-Iran War News Updates: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है। पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए इस प्रस्ताव में ईरान ने ट्रंप प्रशासन के नौ-सूत्रीय ढांचे का जवाब दिया है। अपने प्रस्ताव में ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों पर शांति चाहता है, वरना वह युद्ध के लिए भी पूरी तरह तैयार है।
ईरान के शांति प्रस्ताव की प्रमुख शर्तें
ईरानी मीडिया के अनुसार, इस 14-सूत्रीय योजना में कई बड़ी मांगें रखी गई हैं:
हर मोर्चे पर युद्ध का अंत: ईरान ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत समाप्त करने की मांग की है।
होर्मुज पर नियंत्रण: दुनिया के 20% तेल और LNG के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री रास्ते के लिए एक नया शासी तंत्र बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।
प्रतिबंध और संपत्ति: ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने, फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करने और नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की गई है।
समय सीमा: जहां अमेरिका दो महीने के युद्धविराम की बात कर रहा था, वहीं ईरान ने सभी मुद्दों को हल करने के लिए 30 दिनों की समय सीमा का दबाव बनाया है।
अब अमेरिका को लेना है फैसला
ईरान के उप विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों को संबोधित करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका को चुनना है कि वह कूटनीति का रास्ता चाहता है या आमने-सामने का युद्ध। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के लिए दोनों ही रास्तों के लिए पूरी तरह तैयार है।
'अभी कीमत चुकानी बाकी है'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने नए हमलों का संकेत भी दे दिया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रंप ने लिखा कि उन्हें नहीं लगता कि यह प्रस्ताव 'स्वीकार्य' होगा। उनके अनुसार, ईरान ने पिछले 47 वर्षों में दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए उसने अभी पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। ट्रंप ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि ईरानियों को यह समझने में मुश्किल हो रही है कि उनका असली नेता कौन है।
लेबनान में इजरायली हमले जारी
शांति प्रस्तावों के बीच जमीन पर हिंसा थमी नहीं है। इजरायल ने लेबनान के टायर जिले के सम्मईह शहर में हमले जारी रखे, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। 17 अप्रैल को हुए नाजुक युद्धविराम के बावजूद इजरायली हमले एक नियमित घटना बन गए हैं।