Iran Ceasefire Condition: 'होर्मुज की खाड़ी' में ईरान और अमेरिका के बीच 'कोल्ड वॉर' चल रहा है। दुनिया को उम्मीद थी कि सीजफायर के बाद दोनों देश बातचीत की मेज पर लौटेंगे, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है। एक तरफ ट्रंप ने सीजफायर को बढ़ाने का ऐलान किया है वहीं ईरान ने इससे इनकार करते हुए अमेरिका के सामने एक सख्त शर्त रख दी है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका समुद्र में उसकी घेराबंदी खत्म नहीं करता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी।
'जब तक घेराबंदी रहेगी तब तक कोई बातचीत नहीं'
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर-सईद इरावानी ने ईरानी मीडिया से बात करते हुए अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। ईरान का मानना है कि अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी करना असल में सीजफायर का उल्लंघन है। इरावानी ने साफ किया कि जैसे ही घेराबंदी हटेगी, ईरान अगले दौर की बातचीत के लिए तैयार हो जाएगा। यह बातचीत पाकिस्तान या तुर्की में हो सकती है।
इरावानी ने कहा, 'हमने हमला शुरू नहीं किया है। अगर वे राजनीतिक समाधान चाहते हैं, तो हम तैयार हैं। लेकिन अगर वे जंग चाहते हैं, तो ईरान उसके लिए भी पूरी तरह तैयार है।'
ट्रंप का दावा: 'ईरान को हो रहा है भारी नुकसान'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले पर अपनी अलग राय रखी है। ट्रंप का मानना है कि ईरान बातचीत के लिए इसलिए तड़प रहा है क्योंकि उसे आर्थिक चोट पहुंच रही है। ट्रंप ने दावा किया कि 'होर्मुज की खाड़ी' बंद होने से ईरान को रोजाना करीब 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। हालांकि ट्रंप ने कूटनीति के लिए सीजफायर को थोड़ा और समय दिया है, लेकिन उन्होंने घेराबंदी हटाने पर अभी कोई स्पष्ट वादा नहीं किया है।
ईरान ने शुरू किया एक्शन, कार्गो शिप पर की अंधाधुंध फायरिंग
बयानों के बीच समंदर में जमीनी हकीकत काफी डरावनी है। ब्रिटिश एजेंसी (UKMTO) के अनुसार, ओमान के पास ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की एक गनबोट ने एक कंटेनर जहाज पर गोलियां दागीं। हमले में जहाज को काफी नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी की जान नहीं गई। यह घटना दिखाती है कि तनाव कम होने के बजाय और बढ़ रहा है।