Islamabad Talks: इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई 21 घंटे की बैठक भले ही किसी औपचारिक समझौते पर न पहुंच सकी हो, लेकिन इस दौरान वाशिंगटन का सक्रिय दखल चरम पर था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुलासा किया है कि पूरी बातचीत के दौरान वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ लगातार संपर्क में थे और दोनों के बीच दर्जनों बार फोन पर चर्चा हुई।
ट्रंप के साथ 'हॉटलाइन' पर थे वेंस
एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान जेडी वेंस ने बताया कि 21 घंटों की बातचीत में उन्होंने अनगिनत बार राष्ट्रपति को अपडेट दिया। वेंस ने कहा, 'मैं नहीं जानता कि हमने कितनी बार बात की, शायद आधा दर्जन बार या शायद एक दर्जन से भी ज्यादा बार। हम राष्ट्रपति के साथ लगातार संपर्क में थे।' वेंस केवल ट्रंप ही नहीं, बल्कि युद्ध सचिव पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और एडमिरल ब्रैड कूपर के साथ भी लगातार कूटनीतिक तालमेल बिठा रहे थे।
वेंस ने स्पष्ट किया कि इतनी बातचीत का मकसद नेक नीयत के साथ एक ठोस समाधान निकालना था। उन्होंने कहा, 'हम यहां से एक बहुत ही सरल प्रस्ताव छोड़कर जा रहे हैं, जो हमारा आखिरी और सबसे बेहतरीन प्रस्ताव है।' उन्होंने साफ कर दिया कि मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका को ईरान से यह लिखित और स्पष्ट प्रतिबद्धता चाहिए कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही उन्हें विकसित करने वाली तकनीक जुटाएगा।
ट्रंप का 'कोर गोल' और भविष्य की चिंता
वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि ईरान को हमेशा के लिए परमाणु हथियारों से दूर रखा जाए। वेंस ने माना कि ईरान की ओर से वह इच्छाशक्ति अभी तक नहीं दिखी है जो एक स्थायी शांति के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, 'हमें अभी तक वह प्रतिबद्धता नहीं मिली है, लेकिन हमें उम्मीद है कि भविष्य में ऐसा होगा।'
'अमेरिका की मांगें अतार्किक थीं': ईरान
दूसरी ओर ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने बातचीत के टूटने का पूरा ठीकरा अमेरिका के सिर फोड़ा है। ईरान का दावा है कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने 21 घंटे तक देश के हितों की रक्षा के लिए गहन प्रयास किए। टेलीग्राम पर जारी एक बयान में ईरान ने कहा, 'हमने कई रचनात्मक पहल कीं, लेकिन अमेरिकी पक्ष की अतार्किक मांगों ने बातचीत में प्रगति नहीं होने दी। इसी वजह से वार्ता समाप्त हो गई।'